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Supreme Court ने ट्रिब्यूनल सदस्यों की कार्यकाल को सितम्बर 2026 तक बढ़ाने की अनुमति दी – न्यायिक स्वतंत्रता के निहितार्थ — UPSC Current Affairs | March 9, 2026
Supreme Court ने ट्रिब्यूनल सदस्यों की कार्यकाल को सितम्बर 2026 तक बढ़ाने की अनुमति दी – न्यायिक स्वतंत्रता के निहितार्थ
Supreme Court ने Union Government को ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितम्बर 2026 तक बढ़ाने की अनुमति दी, जिससे Madras Bar Association के फैसले के बाद Tribunal Reforms Act, 2021 को निरस्त करने के कारण संभावित बंदी से बचा गया। यह अंतरिम उपाय नई विधेयक की आवश्यकता को रेखांकित करता है जो ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता, जवाबदेही और सुचारु कार्यप्रणाली सुनिश्चित करे—UPSC Polity और Governance के प्रमुख मुद्दे।
अवलोकन Supreme Court ने 9 मार्च 2026 को Union Government को कई ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितम्बर 2026 तक या तब तक बढ़ाने की अनुमति दी जब तक वे Tribunal Reforms Act, 2021 के तहत निर्धारित अधिकतम आयु तक नहीं पहुँचते। यह आदेश Madras Bar Association केस के फैसले के बाद आया, जिसने ट्रिब्यूनल कार्यप्रणाली के संबंध में एक कानूनी शून्य बना दिया। मुख्य विकास Chief Justice of India Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi के नेतृत्व में बेंच ने CAT Bar Association, Revenue Bar Association और अन्य से याचिकाएँ सुनीं। Attorney General for India R Venkaramani ने कोर्ट को सूचित किया कि Madras Bar Association के निर्देशों के अनुरूप एक नया ट्रिब्यूनल बिल मोनसून सत्र में संसद के सामने रखा जाएगा। कोर्ट ने Union के अंतरिम प्रस्ताव को स्वीकार किया जिससे लगभग 21 सदस्यों की सेवा, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था, का विस्तार किया गया, जिससे ट्रिब्यूनल बेंचों के संभावित बंदी से बचा गया। बेंच ने इस मामले की द्वि-साप्ताहिक निगरानी का निर्देश दिया ताकि विधायी प्रगति को ट्रैक किया जा सके। महत्वपूर्ण तथ्य लगभग 21 ट्रिब्यूनल सदस्यों को नई विधेयक के लागू होने से पहले सेवानिवृत्त होना था। Madras Bar Association के फैसले में ट्रिब्यूनल सदस्यों के लिए न्यूनतम पाँच वर्ष का कार्यकाल अनिवार्य किया गया है। Supreme Court ने ट्रिब्यूनल सदस्यों की जवाबदेही को परिभाषित करने वाले “व्यापक कानून” की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जो न्यायिक स्वतंत्रता और कार्यकारी निगरानी के बीच संतुलन स्थापित करे। निर्णय निर्माण में प्रशासनिक सदस्यों की भूमिका और निर्णय ड्राफ्टिंग को ट्रैक करने के तंत्र को लेकर चिंताएँ उठाई गईं। UPSC प्रासंगिकता इस विकास को समझना
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