Overview
A Supreme Court को एक व्रिट याचिका के माध्यम से संपर्क किया गया है जो Mizo Marriage and Inheritance of Property (Amendment) Act, 2026 की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठाती है। याचिकाकर्ता, एक Mizo महिला जो गैर‑Mizo पुरुष से विवाहित है, का दावा है कि यह संशोधन लिंग‑आधारित भेदभाव बनाता है, Article 14 और Article 15 का उल्लंघन करता है, और उसकी बच्चों के अधिकारों को कमजोर करता है।
Key Developments
- याचिका Mizo Marriage, Divorce and Inheritance of Property Act, 2014 के Sections 2, 3(m), 25 और 26(1) में किए गए संशोधनों को चुनौती देती है।
- Section 2 अब इस अधिनियम को उन विवाहों तक सीमित करता है जहाँ दोनों पति‑पत्नी Mizo हैं या केवल पति Mizo है, जिससे गैर‑Mizo पुरुष से विवाहित Mizo महिलाओं को बाहर रखा गया है।
- Section 3(m) "Mizo" को पितृवंशीय आधार पर पुनः परिभाषित करता है, जन्म/दत्तक मानदंड से पितृवंशीय वंशावली की ओर बदलाव करता है।
- Section 25 महिला की वैवाहिक संपत्ति में हिस्से को सीमित करता है; Section 26(1) महिला की व्यक्तिगत संपत्ति की सुरक्षा को हटा देता है।
- याचिकाकर्ता तर्क देता है कि ये परिवर्तन न केवल वैवाहिक स्थिति बल्कि भूमि, उत्तराधिकार और Scheduled Tribes को मिलने वाले लाभों तक पहुँच को भी प्रभावित करते हैं, जिससे Section 342 के तहत चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
Important Facts
याचिकाकर्ता, जिसे Lalsangliani Colney के रूप में पहचाना गया है, ने 1984 में एक गैर‑Mizo पुरुष से विवाह किया और counsel AoR Pulkit Agarwal के माध्यम से व्रिट दायर किया। मामला शीर्षक है Lalsangliani Colney v. State of Mizoram, Law and Judicial Department Principal Secretary. विवादित संशोधन 2026 में पेश किए गए थे, जो मूल 2014 अधिनियम के एक वर्ष बाद का है।
Exam Relevance
यह मामला UPSC पाठ्यक्रम के कई मुख्य क्षेत्रों को छूता है:
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