<h3>Overview</h3>
<p>Supreme Court ने 10 अप्रैल 2026 को Christian pastor Rev. Father Vineet Vincent Pereira द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका Allahabad High Court के निर्णय को चुनौती देती है, जिसमें कहा गया था कि किसी धर्म को “एकमात्र सत्य धर्म” के रूप में प्रचारित करना Section 295A IPC के तहत दंडनीय हो सकता है। Supreme Court ने पादरी के खिलाफ आगे की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।</p>
<h3>Key Developments</h3>
<ul>
<li>हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश राज्य को नोटिस जारी किया गया।</li>
<li>Bench जिसमें Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta शामिल हैं, ने आपराधिक मामले को स्थगित किया।</li>
<li>याचिका BNSS Section 528 के तहत FIR को रद्द करने की मांग करती है।</li>
<li>Senior Advocate Siddharth Dave तर्क देते हैं कि Section 295A के तहत कोई अपराध स्थापित नहीं हुआ है और मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त साक्ष्य के बिना कार्य किया।</li>
</ul>
<h3>Important Facts</h3>
<p>FIR में आरोप है कि पादरी ने प्रार्थना सभाओं के दौरान बार-बार ईसाई धर्म को एकमात्र सत्य धर्म घोषित किया, जिससे हिंदू भावनाओं को चोट पहुंची। जांच अधिकारी ने हाशिए पर रहने वाले समूहों के अवैध धार्मिक परिवर्तन का कोई प्रमाण नहीं पाया, फिर भी पुलिस ने धार्मिक अपमान के आरोप में चार्जशीट जारी की। हाई कोर्ट ने क्वैश याचिका को खारिज करते हुए दोहराया कि किसी भी धर्म की विशिष्टता का दावा करना “अन्य धर्मों के अपमान का संकेत देता है” एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में।</p>
<h3>UPSC Relevance</h3>
<p>This case touches upon several core UPSC topics:</p>
<ul>
<li>Secularism as enshrined in the Constitution, particularly Article 25‑28.</li>
<li>Interpretation of Section 295A IPC and its balance with freedom of speech under Article 19(1)(a).</li>
<li>Role of the Supreme Court ...</li>
</ul>