अवलोकन
Supreme Court ने 30 April 2026 को Allahabad High Court द्वारा दिया गया जमानत आदेश रद्द कर दिया। 304B IPC के तहत आरोपित पति को एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया और मुकदमे को एक वर्ष के भीतर समाप्त करने का निर्देश दिया गया।
मुख्य विकास
- जज J.B. Pardiwala और जज Vijay Bishnoi से मिलकर बनी बेंच ने मृतक के पिता द्वारा दायर Special Leave Petition को सुना, जिसमें जमानत को चुनौती दी गई थी।
- कोर्ट ने पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट की जांच की, जिसमें गर्दन की चोटें और जीवित रहने से पहले की चोटें दर्ज थीं।
- जज Pardiwala ने बताया कि मृत्यु विवाह के सात वर्षों के भीतर (February 2019 – July 2024) हुई, जिससे Section 113B के तहत अनुमान लागू किया गया।
- कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी, आरोपी को एक सप्ताह के भीतर जेल प्राधिकरणों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और ट्रायल कोर्ट को मुकदमे को एक वर्ष की समयसीमा में तेज करने का आदेश दिया।
महत्वपूर्ण तथ्य
विवाह February 2019 में हुआ था; पत्नी की असामान्य मृत्यु July 2024 में हुई। High Court ने पूर्व में दहेज मृत्यु के प्राथमिक सबूतों के बावजूद जमानत दी थी। आरोपी ने पहले ही 18 महीने हिरासत में बिताए थे, यह बिंदु राज्य वकील ने उठाया, जिसे कोर्ट ने जमानत के योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।
UPSC प्रासंगिकता
यह निर्णय UPSC पाठ्यक्रम के कई मुख्य क्षेत्रों को उजागर करता है:
- न्यायिक समीक्षा और पदानुक्रम: Supreme Court की शक्ति — भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय, संविधान का अंतिम व्याख्याता और एक मूलभूत स्तम्भ।