Supreme Court ने घरेलू हिंसा के मामले में प्रत्याशित जमानत को अस्वीकार किया
Supreme Court की बेंच जिसमें Justice Aravind Kumar और Justice P.B. Varale शामिल हैं, ने घरेलू हिंसा के आरोप में फँसे पति को प्रत्याशित जमानत से इनकार किया। आदेश देते समय, कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी को “जानवर की तरह” नहीं व्यवहार कर सकता और महिलाओं के लिए गरिमा की संवैधानिक गारंटी पर ज़ोर दिया।
मुख्य विकास
- anticipatory bail के लिए याचिका Patna High Court द्वारा इसे अस्वीकार करने के बाद दायर की गई।
- आरोपी पर Indian Penal Code की धारा 126(2), धारा 115(2) और धारा 109 के तहत आरोप हैं।
- कोर्ट के टिप्पणी ने इस मामले को महिलाओं के लिए गरिमा के व्यापक संवैधानिक सिद्धांत से जोड़ा।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. याचिका पर May 10, 2026 को सुनवाई हुई। 2. Supreme Court का आदेश अंतिम है; आरोपी को परीक्षण तक हिरासत में रहना होगा। 3. निर्णय दोहराता है कि घरेलू हिंसा निजी मामला नहीं बल्कि आपराधिक कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
UPSC प्रासंगिकता
• Domestic violence GS‑II (Polity) और GS‑IV (Ethics) पेपरों में बार‑बार आने वाला विषय है, जो उम्मीदवारों की कानूनी सुरक्षा और लैंगिक‑न्याय ढांचों की समझ का परीक्षण करता है।
• anticipatory bail के प्रक्रियात्मक उपकरण को समझना...