Supreme Court ने 22 May 2026 को Union Government को कई बांग्ला‑भाषी व्यक्तियों को, जिन्हें Bangladesh में निर्वासित किया गया था, वापस लाने और आगे की कोई कार्रवाई से पहले उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि करने का निर्देश दिया।
मुख्य विकास
- Solicitor General of India Tushar Mehta ने तीन‑जज बेंच को बताया कि सरकार निर्वासितों को पुनर्वास करेगी और फिर उनकी नागरिकता की स्थिति की जांच करेगी।
- बेंच, जिसमें Chief Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice Vipul Pancholi शामिल थे, ने उन Union याचिकाओं को सुना जो Calcutta High Court के उन व्यक्तियों को Bangladesh भेजने के आदेश को चुनौती देती थीं।
- Senior Advocate Sanjay Hegde ने कहा कि SG के बयान को दर्ज किया जाए, यह शर्त के साथ कि यह अन्य मामलों के लिए precedent नहीं है।
- SG ने अनुमान लगाया कि पुनर्वास 8‑10 दिनों के भीतर पूरा किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
September 2025 में, Calcutta High Court ने habeas corpus याचिकाओं के आधार पर Sunali Khatun, उनके पति Danish Sekh और पुत्र Sabir Sekh, साथ ही Sweety Bibi और उनके पुत्र Kurban और Imam की वापसी का आदेश दिया। Union ने पहले ही December 2025 में Sunali Khatun (जो गर्भवती थीं) और उनके पुत्र को मानवीय कारणों से वापस लाने पर सहमति व्यक्त की थी।
November 2025 की सुनवाई में Supreme Court ने सुझाव दिया कि Union को पहले इन व्यक्तियों को भारत वापस लाना चाहिए ताकि उनकी नागरिकता दावों की पुष्टि की जा सके। वर्तमान आदेश उस सुझाव को औपचारिक बनाता है।
इन मामलों को SLP(Crl) No. 18658/2025 और SLP(Crl) 18891/2025 के रूप में दर्ज किया गया है।
UPSC प्रासंगिकता
ये विकास नागरिकता मामलों में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच की अंतःक्रिया को दर्शाते हैं, जो GS2 में एक आवर्ती विषय है।
Headline: Supreme Court ने निर्वासितों की तेज़ पुनर्वास का आदेश दिया ताकि भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो सके, जिससे कार्यपालिका पर न्यायिक जाँच पर बल दिया गया।
AI Summary: 22 May 2026 को Supreme Court ने Union को बताया कि वह Bangladesh में निर्वासित बांग्ला‑भाषी व्यक्तियों को वापस लाए और आगे की किसी भी कदम से पहले उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि करे। यह निर्णय नागरिकता मामलों में न्यायपालिका की हस्तक्षेप शक्ति और स्पष्ट प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर करता है, जो UPSC Polity का एक प्रमुख विषय है।
Context: यह घटना दर्शाती है कि नागरिकता विवादों में न्यायपालिका कैसे कार्यपालिका की कार्रवाई को जांच सकती है। संविधान के अनुच्छेद 5, 6 और 21 नागरिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित हैं, जबकि अनुच्छेद 32 Supreme Court को habeas corpus जैसे रिट जारी करने की अनुमति देता है। यह आदेश India‑Bangladesh द्विपक्षीय संबंधों और पुनर्वास तथा नागरिकता सत्यापन की प्रशासनिक प्रक्रिया को भी छूता है।
Mains angle: GS 2 – Polity: न्यायपालिका और कार्यपालिका की भूमिका को नागरिकता अधिकारों की सुरक्षा में चर्चा करें, Supreme Court के May 2026 के बांग्ला‑भाषी निर्वासितों के आदेश को केस स्टडी के रूप में उपयोग करते हुए।