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Supreme Court केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है वैवाहिक बलात्कार याचिकाओं पर – सुनवाई की तिथि तय की जाएगी

Supreme Court ने वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की तिथि निर्धारित करने को स्थगित कर दिया है, और संघ सरकार की ठोस प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। ये याचिकाएँ धारा 375 IPC (अब BNS) की संवैधानिक वैधता और अनुच्छेद 14 के साथ उसकी संगतता पर प्रश्न उठाती हैं, जिससे यह मुद्दा कानून, लैंगिक न्याय…
अवलोकन Supreme Court ने वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई की तिथि निर्धारित करने को स्थगित कर दिया है। यह उपयुक्त तिथि निर्धारित करने से पहले पहले संघ सरकार की प्रतिक्रिया पर विचार करेगा। मुख्य विकास सीनियर एडवोकेट Indira Jaising ने बेंच, जिसका नेतृत्व Chief Justice Surya Kant कर रहे हैं, से अनुरोध किया कि केंद्र द्वारा ठोस उत्तर दाखिल करने के बाद इस मामले को नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया जाए। याचिकाएँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 में वैवाहिक बलात्कार अपवाद की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठाती हैं, जिसे अब Bharatiya Nyaya Sanhita ने प्रतिस्थापित किया है। यह समूह BNS की धारा 63 के तहत नए अपवाद पर भी स्पष्टीकरण चाहता है। पहले दिल्ली हाई कोर्ट (May 2022) के विभाजित फैसले और कर्नाटक हाई कोर्ट के अवलोकन, जिन्होंने इस अपवाद को अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताया, पृष्ठभूमि का हिस्सा हैं। महत्वपूर्ण तथ्य याचिकाएँ PILs हैं जो वैवाहिक बलात्कार अपवाद को विवाहित महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण मानते हुए चुनौती देती हैं। संघ ने अब तक केवल एक प्रारंभिक आपत्ति दायर की है, पूर्ण उत्तर नहीं। बेंच, जिसमें Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana शामिल हैं, 9 September को केंद्र की स्थिति को सुनेगा और फिर बाद में तिथि तय करेगा। UPSC प्रासंगिकता यह मामला कई GS विषयों को छूता है: संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 14), आपराधिक कानून सुधार (IPC से BNS में परिवर्तन), लैंगिक न्याय, और विधियों की व्याख्या में न्यायपालिका की भूमिका।
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Quick Reference

Key Insight

Supreme Court वैवाहिक बलात्कार सुनवाई को स्थगित करता है, संविधानिक वैधता पर केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार।

Key Facts

  1. याचिकाएँ Section 375 IPC और Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 63 में वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देती हैं।
  2. Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व में बेंच 9 September 2026 को केंद्र की प्रतिक्रिया सुनेगा।
  3. सीनियर एडवोकेट Indira Jaising ने ठोस उत्तर के बाद इस मामले को नवंबर में सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
  4. Delhi High Court के विभाजित फैसले (May 2022) और Karnataka High Court के अवलोकन ने इस अपवाद को अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताया।
  5. संघ ने PILs के प्रति केवल एक प्रारंभिक आपत्ति दायर की है, पूर्ण उत्तर नहीं।

Background

यह मुद्दा संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 14 समानता), आपराधिक कानून सुधार (IPC से BNS में परिवर्तन), और लैंगिक न्याय के संगम पर स्थित है। यह दर्शाता है कि न्यायपालिका कैसे महिलाओं के अधिकारों पर विधायी परिवर्तन को प्रेरित कर सकती है।

UPSC Syllabus

  • Prelims_GS — Constitution and Political System
  • Essay — Philosophy, Ethics and Human Values
  • GS2 — Executive and Judiciary - structure, organization and functioning
  • GS2 — Welfare schemes for vulnerable sections

Mains Angle

GS 2 – वैवाहिक बलात्कार अपवाद के संवैधानिक चुनौतियों और उनके विधि‑निर्माण तथा लैंगिक समानता पर प्रभावों पर चर्चा करें।

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Overview

Full Article

अवलोकन

Supreme Court ने वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई की तिथि निर्धारित करने को स्थगित कर दिया है। यह उपयुक्त तिथि निर्धारित करने से पहले पहले संघ सरकार की प्रतिक्रिया पर विचार करेगा।

मुख्य विकास

  • सीनियर एडवोकेट Indira Jaising ने बेंच, जिसका नेतृत्व Chief Justice Surya Kant कर रहे हैं, से अनुरोध किया कि केंद्र द्वारा ठोस उत्तर दाखिल करने के बाद इस मामले को नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
  • याचिकाएँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 में वैवाहिक बलात्कार अपवाद की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठाती हैं, जिसे अब Bharatiya Nyaya Sanhita ने प्रतिस्थापित किया है।
  • यह समूह BNS की धारा 63 के तहत नए अपवाद पर भी स्पष्टीकरण चाहता है।
  • पहले दिल्ली हाई कोर्ट (May 2022) के विभाजित फैसले और कर्नाटक हाई कोर्ट के अवलोकन, जिन्होंने इस अपवाद को अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताया, पृष्ठभूमि का हिस्सा हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

याचिकाएँ PILs हैं जो वैवाहिक बलात्कार अपवाद को विवाहित महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण मानते हुए चुनौती देती हैं। संघ ने अब तक केवल एक प्रारंभिक आपत्ति दायर की है, पूर्ण उत्तर नहीं। बेंच, जिसमें Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana शामिल हैं, 9 September को केंद्र की स्थिति को सुनेगा और फिर बाद में तिथि तय करेगा।

UPSC प्रासंगिकता

यह मामला कई GS विषयों को छूता है: संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 14), आपराधिक कानून सुधार (IPC से BNS में परिवर्तन), लैंगिक न्याय, और विधियों की व्याख्या में न्यायपालिका की भूमिका।

Read Original on hindu

Supreme Court वैवाहिक बलात्कार सुनवाई को स्थगित करता है, संविधानिक वैधता पर केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार।

Key Facts

  1. याचिकाएँ Section 375 IPC और Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 63 में वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देती हैं।
  2. Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व में बेंच 9 September 2026 को केंद्र की प्रतिक्रिया सुनेगा।
  3. सीनियर एडवोकेट Indira Jaising ने ठोस उत्तर के बाद इस मामले को नवंबर में सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
  4. Delhi High Court के विभाजित फैसले (May 2022) और Karnataka High Court के अवलोकन ने इस अपवाद को अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताया।
  5. संघ ने PILs के प्रति केवल एक प्रारंभिक आपत्ति दायर की है, पूर्ण उत्तर नहीं।

Background & Context

यह मुद्दा संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 14 समानता), आपराधिक कानून सुधार (IPC से BNS में परिवर्तन), और लैंगिक न्याय के संगम पर स्थित है। यह दर्शाता है कि न्यायपालिका कैसे महिलाओं के अधिकारों पर विधायी परिवर्तन को प्रेरित कर सकती है।

UPSC Syllabus Connections

Prelims_GS•Constitution and Political SystemEssay•Philosophy, Ethics and Human ValuesGS2•Executive and Judiciary - structure, organization and functioningGS2•Welfare schemes for vulnerable sections

Mains Answer Angle

GS 2 – वैवाहिक बलात्कार अपवाद के संवैधानिक चुनौतियों और उनके विधि‑निर्माण तथा लैंगिक समानता पर प्रभावों पर चर्चा करें।

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