अवलोकन
Supreme Court ने 7 September 2026 को सवाल किया कि Uttar Pradesh Police को पत्रकार Abhishek Upadhyay के Digital Footprint की आवश्यकता क्यों है एक road‑rage केस में। पत्रकार ने पहले Ayodhya Ram Temple के लिए दान के कथित दुरुपयोग की रिपोर्ट की थी।
मुख्य विकास
- तीन‑जजों की बेंच, जिसका नेतृत्व Chief Justice of India Surya Kant ने किया, ने Ghaziabad Police Commissioner को X सोशल‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से मांगी गई सटीक जानकारी का विवरण देने वाला हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया।
- Court ने निर्देश दिया कि प्राप्त कोई भी जानकारी आगे के आदेश तक सार्वजनिक रूप से प्रकट नहीं की जानी चाहिए।
- Mr. Upadhyay को पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया, जबकि Court ने उनके याचिका को भी स्वीकार किया कि FIR को खारिज किया जाए या जांच को CBI को स्थानांतरित किया जाए।
- Senior counsel ने डिजिटल डेटा संग्रह पर नई दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, D.K. Basu vs. State of West Bengal के सुरक्षा उपायों को उद्धृत किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
FIR में आरोप है कि Mr. Upadhyay की SUV ने एक दो‑पहिया वाहन को टक्कर मार दी और उन्होंने सवार के खिलाफ जाति‑आधारित गाली-गलौज की। पुलिस ने X के अलावा YouTube से डेटा मांगा और पत्रकार के IMEI नंबर की मांग की, जो 1 June 2026 से वर्तमान तक की अवधि को कवर करता है। यह अनुरोध आरोपित अपराध की तिथि से काफी आगे तक है, जिससे गोपनीयता और जांच अधिकारों की सीमा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
UPSC प्रासंगिकता
यह केस कई मुख्य UPSC विषयों को छूता है:
- Judicial oversight of police powers – Supreme Court का हस्तक्षेप