अवलोकन
Supreme Court ने Union government से अनुरोध किया है कि आने वाले क्लास 6 छात्रों के बैच के लिए तीन‑भाषा नीति के अनिवार्य कार्यान्वयन को स्थगित किया जाए। कोर्ट ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के बजाय January 1 2027 से इस अनिवार्यता को शुरू करने की सिफारिश की है, क्योंकि लॉजिस्टिक सुविधा और वर्तमान समूह के लिए अचानक झटका से बचने की आवश्यकता है।
मुख्य विकास
- Chief Justice of India Surya Kant के नेतृत्व में तीन‑जज बेंच ने यह सुझाव दिया।
- Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana ने चरणबद्ध कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
- Additional Solicitor General Aishwarya Bhati ने पुनर्विचार के लिए कोर्ट की सिफारिश को स्वीकार किया।
- बेंच ने वर्तमान क्लास 6 बैच के लिए तीसरी भाषा को optional (वैकल्पिक) बनाने का प्रस्ताव रखा, जबकि 2027 से इसे mandatory (अनिवार्य) रखा जाएगा।
- CBSE नियमों के तहत, कक्षाएँ 7‑9 पहले से ही मुक्त हैं; वर्तमान क्लास 6 को 2031 तक क्लास 10 बोर्ड में अनिवार्य तीसरी‑भाषा परीक्षा देनी पड़ेगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
तीन‑भाषा नीति पहली बार 2020 में कल्पित की गई थी। कोर्ट का तर्क दो व्यावहारिक बिंदुओं पर आधारित है:
- वर्तमान वर्ष में क्लास 6 में प्रवेश करने वाले छात्रों के पास शैक्षणिक सत्र समाप्त होने से पहले केवल लगभग चार महीने होंगे, जिससे पाठ्यक्रम पुनःडिज़ाइन करना कठिन हो जाता है।
- अनिवार्यता को विलंब करने से सरकार को प्रोत्साहन तैयार करने का समय मिलता है, जिससे बच्चे तीसरी भाषा सीखने के लिए प्रेरित हों, न कि इसे बोझ समझें।
Justice Bagchi ने मज़ाक में कहा कि बिना प्रोत्साहन के बच्चे “भाषा सीखने की बजाय खेलने जाना पसंद करेंगे।”
UPSC प्रासंगिकता
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