समीक्षा
The Supreme Court ने 24 April 2026 को West Bengal के 65 से अधिक poll duty officers द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत विवरण में कथित तार्किक असंगतियों के आधार पर SIR के दौरान electoral roll से बाहर किया गया था। बेंच, जिसका नेतृत्व Chief Justice of India Surya Kant ने किया, ने अधिकारियों को अंतरिम मतदान अनुमति देने से इनकार किया और उन्हें Appellate Tribunals में उपाय तलाशने का निर्देश दिया।
मुख्य विकास
- याचिका ने Election Commission of India और West Bengal Chief Electoral Officer को निर्देश देने की मांग की कि वे अधिकारियों को चल रहे Assembly चुनावों में मतदान करने की अनुमति दें।
- Supreme Court बेंच ने, बहिष्कार को रोकने के बिना, यह ज़ोर दिया कि अधिकारियों को वैधानिक अपील प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करना होगा।
- यह निर्णय वैधानिक उपायों के लंबित रहने के दौरान चुनावी प्रशासन में न्यायपालिका की हस्तक्षेप करने की अनिच्छा को उजागर करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
• 65 से अधिक poll duty officers प्रभावित हुए।
• बहिष्कार SIR सत्यापन में पहचानी गई "logical discrepancies" के आधार पर किया गया।
• याचिका 2026 West Bengal Assembly elections के दौरान दायर की गई, जो एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील अवधि थी।
• बेंच को Chief Justice Surya Kant ने नेतृत्व किया, जो मामले की उच्च‑स्तरीय प्रकृति को दर्शाता है।
UPSC प्रासंगिकता
न्यायपालिका और चुनावी मशीनरी के बीच की अंतःक्रिया को समझना GS2 (Polity) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मामला दर्शाता है:
- Supreme Court की भूमिका — सर्वोच्च न्यायालय, न्यायिक समीक्षा की शक्ति के साथ, संविधान को सुनिश्चित करता है।
