समीक्षा
The Supreme Court ने अपनी असाधारण Article 142 शक्तियों का प्रयोग करके POCSO Act के तहत दंडित एक व्यक्ति की सज़ा को रद्द किया। यह सज़ा एक गंभीर प्रवेशात्मक यौन हमला के लिए थी जब कथित पीड़िता नाबालिग थी। जब जोड़े ने शादी की और महिला कानूनी रूप से वयस्क बन गई, तो Court ने उन्हें पति‑पत्नी के रूप में साथ रहने की अनुमति दी।
मुख्य विकास
- Court ने Article 142 का उपयोग किया और Harur में एक ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया 2019 का दंड रद्द कर दिया।
- Madras High Court ने याचिका को सुनने से इनकार कर दिया और महिला के अतिरिक्त साक्ष्य दाखिल करने के अनुरोध को भी खारिज कर दिया।
- पीड़िता, अब वयस्क, ने वीडियो कॉल के माध्यम से बेंच को व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया कि उसे सज़ा रद्द होने में कोई आपत्ति नहीं है और अपनी सुरक्षा के लिए ₹1 lakh की राशि का अनुरोध किया।
- राज्य सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जताई, यह कहते हुए कि सज़ा को रद्द करने से सामाजिक ताने‑बाने की रक्षा होगी और जोड़े को शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन मिलेगा।
- बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आदेश इस मामले के “विशिष्ट तथ्यों” पर आधारित है और भविष्य के मामलों में precedent नहीं बनेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
• 2019 में, ट्रायल कोर्ट ने POCSO Act के तहत गंभीर प्रवेशात्मक यौन हमला के लिए व्यक्ति को दोषी ठहराया और उसे दस साल की जेल की सज़ा सुनाई।
• जोड़ा तब प्रेम में पड़ा जब महिला क्लास‑12 की छात्रा (नाबालिग) थी। जब व्यक्ति ने शादी से इनकार किया, तो उसने आपराधिक शिकायत दायर की, जिससे सज़ा हुई।
• पुनर्मिलन के बाद, जब महिला 18 वर्ष की हुई, तो जोड़े ने शादी की और वे पति‑पत्नी के रूप में साथ रहने लगे।
• The appellant deposited the