Supreme Court ने Bangalore Water Supply केस में ‘Industry’ की परिभाषा को पुनः देखे जाने पर निर्णय को स्थगित किया (2026) — UPSC Current Affairs | March 19, 2026
Supreme Court ने Bangalore Water Supply केस में ‘Industry’ की परिभाषा को पुनः देखे जाने पर निर्णय को स्थगित किया (2026)
19 मार्च 2026 को, Supreme Court की नौ‑जजों की बेंच ने यह निर्णय स्थगित किया कि 1978 के Bangalore Water Supply केस में “industry” की विस्तृत परिभाषा को पुनः देखना चाहिए या नहीं। सुनवाई में Industrial Disputes Act, 1947 और 2020 के Industrial Relations Code की लागूता पर तर्क-वितर्क हुए, जिनका श्रम नीति और संवैधानिक व्याख्या पर प्रभाव पड़ता है।
Overview On 19 March 2026 , a nine‑judge bench of the Supreme Court headed by Chief Justice Surya Kant ने यह निर्णय स्थगित किया कि 1978 के Bangalore Water Supply निर्णय में industry की व्यापक परिभाषा को पुनः देखना चाहिए या नहीं। यह मामला मूल “triple test” को Industrial Relations Code, 2020 में अपनाई गई परिभाषा के विरुद्ध रखता है, जिससे श्रम विधायन की पहुँच कल्याण और सार्वभौमिक कार्यों तक कितनी है, इस पर प्रश्न उठते हैं। Key Developments Attorney General R. Venkataramani ने तर्क दिया कि Justice Iyer का triple test, यद्यपि तर्कसंगत है, अत्यधिक व्यापक है और Industrial Disputes Act, 1947 के तहत कल्याण‑संबंधी सार्वभौमिक गतिविधियों को शामिल नहीं करना चाहिए। Additional Solicitor General K.M. Nataraj और महाराष्ट्र, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ वकीलों ने 2020 Code की “activities relatable to sovereign functions” का हवाला देते हुए व्यापक व्याख्या की मांग की। Senior advocates Indira Jaising, C.U. Singh और अन्य ने तर्क दिया कि परिभाषा को संकीर्ण नहीं किया जाना चाहिए, और 1947 Act की कार्यकर्ता‑केन्द्रित प्रकृति पर बल दिया। Amicus curiae JP Cama और P. Sengupta ने नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध की प्रासंगिकता और industry की परिभाषा में चैरिटी की भूमिका पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।