Supreme Court का ‘Industry’ परिभाषा संबंधी निर्णय
On 20 August 2026 Supreme Court of India ने एक दीर्घकालिक रेफ़रेंस पर अपना फ़ैसला सुनाया, जो BWSSB द्वारा स्थापित परीक्षण से संबंधित था। रेफ़रेंस ने पूछा कि Industrial Disputes (ID) Act, 1947 के Section 2(j) का परीक्षण, अधिनियम के निरसन के बाद भी प्रासंगिक है या नहीं।
मुख्य विकास
- नौ‑जज बेंच ने रेफ़रेंस को सुना, भले ही ID Act को Industrial Relations Code (IRC) 2020 द्वारा 21 November 2025 को लागू होने के बाद निरस्त किया गया था।
- चार जज, जो CJI द्वारा नेतृत्व किए गए, ने ऐतिहासिक Triple Test को पुनः व्यवस्थित किया लेकिन इसे “hypothetical” कहा।
- तीन जज (Justices D. Datta, U. Bhuyan, और B.V. Nagarathna) ने कहा कि रेफ़रेंस अनावश्यक था क्योंकि शासकीय कानून अब मौजूद नहीं रहा।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नया IRC अपने स्वयं के शर्तों पर व्याख्यायित होना चाहिए और BWSSB के पूर्वनिर्णय से बंधा नहीं होना चाहिए।
- पुराने ID Act के तहत लंबित विवादों को BWSSB ढांचे के तहत ही निपटाया जाएगा, लेकिन निरस्त अधिनियम के तहत कोई नया मामला नहीं बन सकता।
महत्वपूर्ण तथ्य
मूल Triple Test ने (i) क्या गतिविधि संगठित है, (ii) क्या वह श्रम को व्यवस्थित रूप से नियोजित करती है, और (iii) क्या वह लाभ के उद्देश्य से है, की जाँच की। 2020 IRC ने Section 2(p) के तहत “industry” की नई परिभाषा पेश की, लेकिन कोर्ट ने अभी तक इसे व्याख्यायित नहीं किया क्योंकि कोई मामला प्रस्तुत नहीं हुआ।
UPSC प्रासंगिकता
यह निर्णय कई GS विषयों को छूता है:
- Headline: Supreme Court ने BWSSB परीक्षण को ID Act के निरसन के बाद अप्रासंगिक बना दिया – labour law परिभाषा पर प्रभाव।
- AI Summary: 20 August 2026 को Supreme Court ने यह फैसला सुनाया कि Industrial Disputes Act के निरसन और Industrial Relations Code 2020 द्वारा प्रतिस्थापन के बाद BWSSB रेफ़रेंस निरर्थक है। यह निर्णय भविष्य के labour‑law मामलों को IRC के Section 2(p) में नई ‘industry’ परिभाषा की व्याख्या करने की आवश्यकता बनाता है, जो UPSC परीक्षा में polity, economy और social justice के लिए महत्वपूर्ण बिंदु है।
- Context: यह मामला labour legislation की व्याख्या में Supreme Court की भूमिका और worker‑centric से संभावित employer‑friendly कानूनी ढाँचे में बदलाव को उजागर करता है। यह सीधे GS‑2 (polity and judicial review) और GS‑3 (industrial relations law के विकास) से जुड़ा है।
- Mains angle: Mains में चर्चा करें कि यह निर्णय कैसे अदालतों को नए IRC की ‘industry’ परिभाषा की व्याख्या करने के लिए बाध्य करता है और इसका workers' rights पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह GS‑2 (polity) और GS‑3 (economy) पेपरों के लिए प्रासंगिक है।