समीक्षा
The Supreme Court ने यह फैसला दिया कि अभियुक्त को chargesheet के भाग बनने वाले दस्तावेज़ों तक पहुँच से वंचित नहीं किया जा सकता। यह आदेश सेवानिवृत्त Major General V.K. Singh, एक पूर्व RAW अधिकारी, के मामले में आया है, जिनके खिलाफ Official Secrets Act के तहत गोपनीय सामग्री के खुलासे का आरोप है।
मुख्य विकास
- न्यायाधीश J.K. Maheshwari और A.S. Chandurkar की बेंच ने CBI को “अत्यंत गोपनीय” दस्तावेज़ों की टाइप की हुई प्रति अभियुक्त को प्रदान करने का निर्देश दिया।
- कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि ऐसे दस्तावेज़ों को रोकना Article 21 के तहत न्यायसंगत परीक्षण के अधिकार को नुकसान पहुँचाएगा।
- CBI को यह शर्त के साथ दस्तावेज़ प्रदान करने का आदेश दिया गया कि वे केवल न्यायालयीय कार्यवाही में उपयोग हों और सार्वजनिक रूप से प्रकट न हों।
- इस संबंध में एक अंडरटेकिंग अपीलकर्ता द्वारा एक महीने के भीतर दाखिल करनी होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. यह मामला सितंबर 2007 में तब शुरू हुआ जब CBI ने शिकायत दर्ज की कि Singh ने अपनी पुस्तक *India's External Intelligence – Secrets of Research and Analysis Wing* के माध्यम से गोपनीय जानकारी उजागर की।
2. अप्रैल 2008 में Official Secrets Act और भारतीय दंड संहिता के तहत एक chargesheet दायर किया गया, जिसमें वर्गीकृत दस्तावेज़ों को सील रखने की मांग की गई।
3. Singh ने Section 207 of the CrPC का हवाला देते हुए chargesheet के भाग बनने वाले दस्तावेज़ों की प्रतियां प्राप्त करने का अनुरोध किया।
4. दिसंबर 2009 में ट्रायल कोर्ट ने CBI को दस्तावेज़ प्रदान करने का आदेश दिया, यह शर्त रखते हुए कि वे Singh के वकील के व्यक्तिगत अभिकरण में रहें और प्रसारित न हों।
5. दिल्ली हाई कोर्ट ने बाद में आदेश में संशोधन किया, Singh को दस्तावेज़ों का निरीक्षण करने की अनुमति दी लेकिन प्रतियां नहीं। Supreme Court ने हाई कोर्ट के संशोधन को निरस्त कर ट्रायल कोर्ट के निर्देश को पुनर्स्थापित किया।