Overview
Supreme Court ने High Court के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने CISF के एक कांस्टेबल को पुनःस्थापित किया था। कांस्टेबल को दूसरी शादी करने के कारण बर्खास्त किया गया था, जबकि उसकी पहली शादी अभी भी चल रही थी, जो CISF Rules, 2001 के Rule 18(b) के तहत उल्लंघन माना गया। निर्णय सेवा‑अनुशासनात्मक मामलों में judicial review के दायरे को स्पष्ट करता है और यह ज़ोर देता है कि दंड misconduct के अनुपातिक होना चाहिए।
Key Developments
- Supreme Court ने हाई कोर्ट के हस्तक्षेप को खारिज कर दिया, बर्खास्तगी आदेश को पुनःस्थापित किया।
- इसने कहा कि बर्खास्तगी कांस्टेबल के बिगैमस कार्य के अनुपातिक प्रतिक्रिया थी, जो नैतिक पतन का रूप है।
- कोर्ट ने ज़ोर दिया कि अदालतें केवल तब ही अनुशासनात्मक कार्यवाही में हस्तक्षेप कर सकती हैं जब कानून का स्पष्ट उल्लंघन, प्रक्रियात्मक निष्पक्षता, या मनमाना व्यवहार हो।
- निर्णय proportionality of punishment को सेवा कार्यों की युक्तिसंगतता का आकलन करने के मानक के रूप में व्याख्यायित करता है।
Important Facts
• कांस्टेबल की दूसरी शादी को सेवा आचरण के उल्लंघन के रूप में माना गया, जो disciplinary proceedings के तहत आता है।
• Rule 18(b) के तहत, नैतिक पतन शामिल करने वाला दुराचार बर्खास्तगी का कारण बन सकता है।
• हाई कोर्ट ने पहले बर्खास्तगी को अत्यधिक मानते हुए पुनःस्थापना का आदेश दिया था; Supreme Court ने असहमति जताई।
Exam Relevance
यह मामला है
