समीक्षा
29 May 2026 को Supreme Court ने स्पष्ट किया कि बच्चों की तस्करी से जुड़े अपराध, जो CSE के लिए हैं, को सख्त POCSO Act के तहत, साथ ही Bharatiya Nyaya Sanhita के प्रासंगिक प्रावधानों और Immoral Traffic (Prevention) Act (ITPA) के तहत दायर किया जा सकता है। निर्णय ने Article 23 के तहत संवैधानिक गारंटी और Article 21 के तहत गरिमा के अधिकार पर भी बल दिया।
मुख्य विकास
- बाल पीड़ित की सहमति को उपयोग किए गए "साधन" (धमकी, बल, धोखा आदि) की परवाह किए बिना अप्रासंगिक माना गया है।
- जब पीड़ित बच्चा हो, तो तस्करी अपराधों पर POCSO प्रावधान लागू होंगे, साथ ही नए आपराधिक संहिता और ITPA के धारा भी लागू होंगी।
- अदालत ने कानून प्रवर्तन को पीड़ित‑केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया, जो केवल बचाव के बजाय पुनर्वास पर केंद्रित हो।
- जांच अधिकारी को आरोप दर्ज करने से पहले पूरी कानूनी रूपरेखा – पीड़ित की आयु, उपयोग किए गए साधन, और शोषण की प्रकृति – को ध्यान में रखना चाहिए।
- राज्य और NGOs, जैसे Prajwala, को पुनः‑पीड़ित बनने से रोकने के लिए पुनर्वास तंत्र को सुदृढ़ करने का आग्रह किया गया है।
महत्वपूर्ण तथ्य
बेंच, जिसमें Justices J.B. Pardiwala and R. Mahadevan शामिल हैं, ने दोहराया कि किसी भी बलपूर्वक "साधन" का उपयोग स्वचालित रूप से सहमति के किसी भी दावे को निरस्त कर देता है। यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि धोखा शामिल है तो सेक्स व्यापार में व्यक्ति की जागरूकता उसे तस्करी पीड़ित होने से बाहर नहीं करती। निर्णय ने उजागर किया कि POCSO Act रिपोर्टिंग, बयान रिकॉर्ड करने और चिकित्सा जांच करने के लिए एक बाल‑मित्र प्रक्रिया निर्धारित करता है, जिससे अधिक संवेदनशीलता सुनिश्चित होती है।