Supreme Court ने Gujarat की Vadodara कार दुर्घटना आरोपी की जमानत के चुनौती को खारिज किया
Supreme Court, Justice Vikram Nath और N.V. Anjaria के बेंच में, Gujarat के विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) को खारिज कर दिया, जिसमें Gujarat High Court द्वारा 23‑वर्षीय कानून छात्र Rakshit Ravish Chorasiya को दी गई नियमित जमानत को चुनौती दी गई थी, जो एक ड्रग‑प्रभावित कार दुर्घटना में एक की मृत्यु और नौ को च…
Supreme Court ने 15 March 2026 को State of Gujarat द्वारा दायर Special Leave Petition (SLP) को खारिज किया। यह याचिका Gujarat High Court द्वारा Rakshit Ravish Chorasiya को दी गई जमानत आदेश को चुनौती देती थी, जो 23‑वर्षीय कानून छात्र हैं और मार्च 2025 में हुई घातक कार दुर्घटना के आरोपी हैं। मुख्य विकास दो‑जज बेंच, जिसमें Justice Vikram Nath और Justice N.V. Anjaria शामिल हैं, ने जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, यह नोट करते हुए कि आरोपी ने पहले ही नौ महीने हिरासत में बिताए हैं। राज्य ने तर्क दिया कि Chorasiya एक ड्रग एडिक्ट है, उसने तीन टक्करों का कारण बना, और कोई पछतावा नहीं दिखाया, तथा NDPS Act के तहत एक अतिरिक्त FIR भी दर्ज है। Court ने देखा कि अपराध "इच्छापूर्ण या स्वैच्छिक" नहीं था और इसलिए Indian Penal Code के Section 105 के तहत अधिकतम सजा निरंतर हिरासत का निर्णायक कारक नहीं थी। सभी आरोप, जो culpable homicide से लेकर Motor Vehicles Act के उल्लंघन तक हैं, अभी भी लंबित हैं, लेकिन जमानत बरकरार रखी गई। महत्वपूर्ण तथ्य Chorasiya कई धारा के तहत आरोपों का सामना कर रहा है: Section 105 (culpable homicide not amounting to murder) Section 281 (rash driving), Section 125 (act endangering life), Section 324(5) (mischief), Section 54 (abettor present) Motor Vehicles Act के प्रावधान: Sections 134 (owner’s duty to give information), 177 (general punishment), 184 (driving dangerously), 185 (driving under influence of drugs/alcohol) UPSC प्रासंगिकता यह मामला UPSC aspirants के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नियमित जमानत, SLP प्रक्रिया, और न्यायिक विवेक के सिद्धांतों को स्पष्ट करता है, जो GS‑2 (Polity) और GS‑3 (Governance & Law) में अक्सर पूछे जाते हैं।
Quick Reference
Key Insight
Supreme Court ने जमानत को बरकरार रखा, आपराधिक मामलों में न्यायिक विवेक को उजागर किया
Key Facts
- 15 Mar 2026: Supreme Court ने Gujarat की जमानत को चुनौती देने वाली Special Leave Petition (SLP) को खारिज किया।
- आरोपी Rakshit Ravish Chorasiya, 23‑वर्षीय कानून छात्र, को एक घातक कार दुर्घटना (Mar 2025) के लिए आरोपित किया गया।
- जमानत आदेश जारी होने से पहले वह पहले ही नौ महीने हिरासत में रहे थे।
- आरोपों में IPC धारा 105 (हत्या न बनने वाला दुष्कर्म), धारा 281, 125, 324(5), 54; Motor Vehicles Act धारा 134, 177, 184, 185; और NDPS Act के तहत एक FIR शामिल हैं।
- बेंच में Justice Vikram Nath और Justice N.V. Anjaria शामिल थे।
- अदालत ने देखा कि अपराध \"जाने‑बूझ या स्वैच्छिक\" नहीं था; इसलिए धारा 105 के तहत अधिकतम दंड जमानत से इनकार करने का आधार नहीं था।
- जमानत बरकरार रखी गई; सभी आरोपों पर मुकदमा चल रहा है।
Background
यह निर्णय Supreme Court की राज्य‑द्वारा दायर SLPs पर न्यायिक समीक्षा की शक्ति को दर्शाता है और उस पदानुक्रम को सुदृढ़ करता है जहाँ सर्वोच्च न्यायालय निचली अदालत के जमानत निर्णयों की पुष्टि कर सकता है। यह जमानत न्यायशास्त्र पर भी प्रकाश डालता है—जाने‑बूझ कर किए गए अपराधों को उन अपराधों से अलग करता है जो लापरवाही या नशे के कारण होते हैं—जो Polity सिलेबस और आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों से संबंधित है।
UPSC Syllabus
- Prelims_GS — Constitution and Political System
- GS2 — Executive and Judiciary - structure, organization and functioning
- GS4 — Dimensions of ethics - private and public relationships
Mains Angle
GS 2 – जमानत निर्णयों में न्यायिक विवेक की भूमिका और इसका व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा सामाजिक सुरक्षा के संतुलन पर प्रभाव पर चर्चा करें; एक संभावित प्रश्न इस मामले में Supreme Court के दृष्टिकोण का मूल्यांकन करने को कह सकता है।