समीक्षा
Supreme Court ने फैसला किया कि Gurugram, Haryana में दर्ज नई FIR को Delhi में Economic Offences Wing (EOW) की पहले की जांच के साथ क्लब किया जाना चाहिए। यह मामला developer Amit Katyal के "Brahma City/Krrish World" real‑estate प्रोजेक्ट में कथित धोखाधड़ी से संबंधित है।
मुख्य विकास
- Court ने दोहराया कि समान तथ्यों पर कई FIRs CrPC की योजना का उल्लंघन करती हैं।
- इसने FIR No. 439/2024 (Gurugram) को FIR No. 30/2019 (Delhi EOW) के साथ क्लब करने का आदेश दिया, यह बताते हुए कि दोनों ही होमबायर्स के खिलाफ समान आरोपों से उत्पन्न होते हैं।
- Court ने भविष्य की FIRs पर व्यापक प्रतिबंध की याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि समान लेन‑देन पर कोई भी नई FIR मौजूदा कानूनी उपायों के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।
- Haryana राज्य ने SIT की भागीदारी और शैल कंपनियों के माध्यम से फंड के विचलन को उजागर किया।
- Delhi Police ने एक ही एजेंसी के तहत जांच को एकीकृत करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
महत्वपूर्ण तथ्य
• विवाद cheating, criminal breach of trust और होमबायर्स से एकत्रित धन के दुरुपयोग के आरोपों पर केंद्रित है, जिन्हें प्लॉट और फ्लैट का वादा किया गया था लेकिन कब्जा नहीं मिला।
• Delhi EOW ने पहले ही 83 शिकायतों को क्लब किया था और एक charge‑sheet दायर किया था; मुकदमा प्रक्रिया लंबित है।
• एक पहले की Delhi FIR (2016) ने निष्कर्ष निकाला कि लेन‑देन "स्पष्ट रूप से सिविल प्रकृति" के थे और उनमें आपराधिक इरादा नहीं था।
• Supreme Court का निर्णय Justice Pankaj Mithal और Justice Prasanna B. Varale द्वारा दिया गया (citation: 2026 LiveLaw (SC) 516)।
UPSC प्रासंगिकता
यह निर्णय एकल, एकीकृत सिद्धांत को रेखांकित करता है।