Overview
23 April 2026 को, Supreme Court ने AIMPLB से महिलाओं के Masjid में प्रवेश संबंधी तर्क सुने। वरिष्ठ वकील MR Shamsahd ने तर्क दिया कि महिलाओं के Masjid में प्रवेश पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं है, और ERP टेस्ट को इस्लाम पर गलत रूप से लागू किया गया है।
Key Developments
- इस्लाम की सभी संप्रदाय इस बात पर सहमत हैं कि महिलाएँ Masjid में प्रवेश कर सकती हैं; हालांकि, उनके लिए सामूहिक प्रार्थना अनिवार्य नहीं है।
- बेंच, जिसमें Chief Justice Surya Kant और सात अन्य न्यायाधीश शामिल हैं, ने याचिकाओं को चल रहे Sabarimala reference से जोड़ा, और Article 25 तथा Article 26 का हवाला दिया।
- Shamsahd ने तर्क दिया कि Masjid में “sanctum sanctorum” की अवधारणा नहीं है, जैसा कि दरगाहों में है, और बाधा या अलग प्रवेश द्वार लगाना Masjid की आंतरिक अनुशासन का उल्लंघन है।
- वकील ने पिछले निर्णयों को उजागर किया जहाँ अदालतों ने Masjid (Masjid) को गैर‑आवश्यक घोषित किया, इसे यह कहने के समान माना कि मंदिर गैर‑आवश्यक है, जिससे संवैधानिक टेस्ट को चुनौती मिली।
- “beard” केस का उल्लेख किया गया, जहाँ एक मुस्लिम सैनिक के दाढ़ी को गैर‑आवश्यक माना गया, जो सिख धार्मिक आदेशों के विपरीत है।
Important Facts
• वरिष्ठ वकील ने प्रामाणिक Hadith का उद्धरण दिया —
