Supreme Court ने ‘Industry’ की परिभाषा को पुनः‑परिक्षण करने के लिए 9‑जज बेंच गठित की — UPSC Current Affairs | March 14, 2026
Supreme Court ने ‘Industry’ की परिभाषा को पुनः‑परिक्षण करने के लिए 9‑जज बेंच गठित की
Supreme Court, Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व में, ने Industrial Disputes Act के तहत 1978 की व्यापक “industry” परिभाषा को दोबारा देखने के लिए नौ‑जज की Constitution Bench बनाई है। यह बेंच सरकारी‑चलित गतिविधियों पर परिभाषा के लागू होने से लेकर नए श्रम कोड्स के प्रभाव तक के मुद्दों को सुनेगी, जो UPSC aspirants के लिए श्रम कानून और संवैधानिक न्यायशास्त्र का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण है।
The Supreme Court ने नौ‑जज की Constitution Bench की सूचना दी है ताकि 1978 के Bangalore Water Supply and Sewerage Board v. A. Rajappa निर्णय में दी गई “industry” शब्द की विस्तृत व्याख्या की पुनः‑समीक्षा की जा सके। Key Developments Bench का नेतृत्व Chief Justice of India Surya Kant कर रहे हैं, साथ में Justices BV Nagarathna, PS Narasimha, Dipankar Datta, Ujjal Bhuyan, Satish Chandra Sharma, Joymalya Bagchi, Alok Aradhe और Vipul M. Pancholi हैं। सुनवाई 17–18 March 2026 के लिए निर्धारित है। चार मुख्य मुद्दे पहचाने गए हैं, जिनमें 1978 के निर्णय के पैराग्राफ 140‑144 में स्थापित परीक्षण की शुद्धता और Industrial Disputes Act, 1947 तथा नए श्रम कोड्स का “industry” की परिभाषा पर प्रभाव शामिल है। Important Facts 1978 का निर्णय, Justice V.R. Krishna Iyer द्वारा लिखित, यह माना गया कि कोई भी व्यवस्थित गतिविधि जो नियोक्ता‑कर्मचारी सहयोग से वस्तुओं/सेवाओं के उत्पादन या वितरण के लिए आयोजित हो, उसे industry कहा जा सकता है, चाहे लाभ का उद्देश्य हो या न हो। Bench यह जांचेगी कि Industrial Relations Code, 2020 और निष्क्रिय Industrial Disputes (Amendment) Act, 1982 पहले की परिभाषा को बदलते हैं या नहीं। प्रश्न यह भी उठते हैं कि क्या सरकारी विभागों की सामाजिक‑कल्याण योजनाएँ और “sovereign function” के रूप में वर्गीकृत गतिविधियाँ Section 2(j) के दायरे में आती हैं। UPSC Relevance इस बेंच को समझना GS‑2 (Polity) और GS‑3 (Economy) aspirants के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केस दर्शाता है: