अवलोकन
The Supreme Court ने 12 June 2026 को Meenakshi Natarajan द्वारा दायर याचिका को खारिज किया, जिसमें वह Madhya Pradesh से Rajya Sabha चुनाव के लिए अपने नामांकन को खारिज किए जाने को चुनौती दे रही थीं। रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि Natarajan ने अपने Form 26 अफिडेविट में एक लंबित आपराधिक शिकायत का खुलासा नहीं किया था।
मुख्य विकास
- Natarajan द्वारा दायर याचिका को Supreme Court ने 12 June 2026 को खारिज कर दिया।
- रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि उम्मीदवार ने 2025 की एक आपराधिक शिकायत का खुलासा नहीं किया, जिसमें एक पार्टी नेता के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप था।
- यह विवाद Section 33‑A के तहत ROPA में प्रकटीकरण की सीमा और Form 26 में 2018 संशोधन के बारे में प्रश्न उठाता है।
- कोर्ट ने पूर्वनिर्णय N.P. Ponnuswami v. Returning Officer (1952) पर भरोसा किया, जो Article 329(b) के तहत न्यायिक हस्तक्षेप को रोकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. आपराधिक antecedents का प्रकटीकरण करने का वैधानिक दायित्व 2002 में Section 33‑A के माध्यम से पेश किया गया, जो Supreme Court के Union of India v. Association for Democratic Reforms (2002) निर्णय के बाद आया।
2. Conduct of Election Rules के Rule 4A के तहत Form 26 दाखिल करना अनिवार्य है।
Headline: Supreme Court ने चुनावी अफिडेविट में पूर्ण आपराधिक‑मामले के प्रकटीकरण का समर्थन किया, जिससे चुनावी पारदर्शिता कड़ी हुई।