Supreme Court ने तकनीकी‑सदस्य बहुमत के बावजूद NCLAT आदेशों को बरकरार रखा — ट्रिब्यूनल संरचना पर प्रभाव — UPSC Current Affairs | March 11, 2026
Supreme Court ने तकनीकी‑सदस्य बहुमत के बावजूद NCLAT आदेशों को बरकरार रखा — ट्रिब्यूनल संरचना पर प्रभाव
Supreme Court ने कहा कि NCLAT के आदेश को केवल इसलिए अवैध नहीं घोषित किया जा सकता क्योंकि उसकी बेंच में तकनीकी सदस्यों की बहुमत थी। इस फैसले ने Bharti Telecom Ltd. की पूँजी‑कटौती योजना की वैधता को बरकरार रखा, यह स्पष्ट किया कि वर्तमान विधायी प्रावधान केवल बेंच में कम से कम एक judicial member की आवश्यकता रखते हैं, बहुमत नहीं।
Supreme Court ने तकनीकी‑सदस्य बहुमत के बावजूद NCLAT आदेशों को बरकरार रखा Supreme Court ने Bharti Telecom Ltd. की पूँजी‑कटौती योजना को लेकर उठाए गए चुनौतियों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि NCLAT की बेंच की संरचना केवल इसलिए आदेश को अवैध नहीं बना सकती क्योंकि तकनीकी सदस्य न्यायिक सदस्यों से अधिक हैं। मुख्य विकास बेंच, जिसका नेतृत्व Justice Sanjay Kumar और Justice K. Vinod Chandran ने किया, ने NCLAT के सर्वसम्मत निर्णय को बरकरार रखा। आवेदकों ने तर्क दिया कि बेंच ने Union of India v. Madras Bar Association (2010) में स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन किया, जिसमें हाई कोर्टों की जगह लेने वाले ट्रिब्यूनलों में judicial members की बहुमत की आवश्यकता थी। कोर्ट ने कहा कि Section 418A केवल कम से कम एक judicial member और एक technical member की उपस्थिति अनिवार्य करता है; judicial majority की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने जोर दिया कि technical members अधीनस्थ न्यायाधीश नहीं हैं और आवश्यक डोमेन विशेषज्ञता लाते हैं। Supreme Court ने NCLT द्वारा स्वीकृत पूँजी‑कटौती प्रक्रिया को मान्यता दी और पुष्टि की कि वह स्पष्ट कानूनी प्रश्न न उठने तक साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन नहीं करेगा। महत्वपूर्ण तथ्य निर्णय की तिथि: 11 March 2026. मामले का शीर्षक: Pannalal Bhansali vs. Bharti Telecom Ltd. & Ors. जाँच किया गया कानूनी प्रावधान: Section 418A of the Companies Act, 2013. परिणाम: Appeals dismissed; NCLAT and NCLT orders upheld.