अवलोकन
On 21 April 2026, the Supreme Court ने Centre, National Investigation Agency और अन्य उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किए। ये नोटिस National Investigation Agency Act, 2008 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका के लिखित उत्तर मांगते हैं।
मुख्य विकास
- Bench comprising Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta ने नोटिस जारी किया।
- याचिका प्रश्न करती है कि क्या National Investigation Agency Act, 2008 संघीय संरचना का उल्लंघन करता है या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
- सभी पक्षों को Court द्वारा निर्धारित समय‑सीमा के भीतर अपने उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है (सटीक अंतिम तिथि अभी तय होनी है)।
महत्वपूर्ण तथ्य
National Investigation Agency Act, 2008 को 2008 मुंबई हमलों के बाद लागू किया गया था ताकि आतंकवाद जांच के लिए एक समर्पित एजेंसी प्रदान की जा सके। NIA, Ministry of Home Affairs के तहत कार्य करता है और सभी राज्यों में आतंकवाद‑संबंधी अपराधों पर अधिकार रखता है, जिससे अलग‑अलग राज्य जांच की आवश्यकता नहीं रहती।
Supreme Court, संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत, वैधानिक प्रावधानों की संवैधानिकता की जांच करने की न्यायिक समीक्षा शक्ति रखता है। NIA Act को चुनौती देना राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं और संघीय सिद्धांतों के बीच संतुलन की परीक्षा है।
UPSC प्रासंगिकता
यह विकास GS 2 (Polity) के लिए प्रासंगिक है क्योंकि इसमें संवैधानिक व्याख्या, शक्ति विभाजन का सिद्धांत, और विधायी क्षमता का दायरा शामिल है। उम्मीदवारों को anti‑terror legislation के मामलों में न्यायिक समीक्षा के स्थापित precedent‑setting स्वरूप और centre‑state संबंधों पर संभावित प्रभाव को नोट करना चाहिए।
आगे का रास्ता
Court का अंतिम निर्णय या तो Act की वैधता को पुनः पुष्टि कर सकता है, जिससे केंद्र सरकार के anti‑terror ढांचे को मजबूत किया जाएगा, या इसके कुछ भागों को निरस्त कर सकता है, जिससे विधायी संशोधनों की आवश्यकता पड़ेगी। अंतिम आदेश की निगरानी करना आवश्यक होगा।
