समीक्षा
8 September 2026 को, Supreme Court में मुख्य याचिकाकर्ता ने Delhi Police द्वारा 20 July 2026 को NEET‑UG विरोध को संभालने के तरीके को चुनौती देते हुए एक उत्तर याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का दावा है कि पुलिस और Union Ministry of Home Affairs ने ऐसा कार्य किया जो संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करता है और आपराधिक व्यवहार के रूप में माना जा सकता है।
मुख्य विकास
- याचिकाकर्ता ने पैरामिलिट्री बलों की “पूर्व-सक्रिय और सैन्यीकृत” तैनाती और छड़ियों से लैस उकसाने वालों के कथित घुसपैठ का उल्लेख किया है।
- छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध लाठी, पेललेट गन, टीयर गैस और जल-कैनन के उपयोग को “शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने” के प्रयास के रूप में वर्णित किया गया है।
- एक High‑Powered Enquiry Committee का गठन किया गया है, लेकिन याचिकाकर्ता का तर्क है कि बड़ा संवैधानिक प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है।
- उत्तर याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और Union Ministry of Home Affairs की तैनाती से संबंधित नीति निर्देशों के लिए जवाबदेही की मांग की गई है।
- “स्पॉटर्स” और नाम‑टैग के बिना नागरिक पोशाक वाले अधिकारियों के दावों को Delhi Police Act, 1978 के तहत वैधानिक समर्थन की कमी के कारण चुनौती दी गई है।
- जंतर मंतर पर निगरानी में कथित तौर पर निजी व्यावसायिक फर्मों की भागीदारी थी, जिससे RTI और लोकतांत्रिक जवाबदेही के क्षरण को लेकर चिंताएँ उठती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
याचिकाकर्ता कई तथ्यात्मक अंतरालों को उजागर करता है:
- बल के उपयोग, जिसमें पेललेट‑प्रकार की गोलाबारी शामिल है, को उचित ठहराने के लिए कोई लिखित आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया।
- पुलिस ने बड़े पैमाने पर Central Armed Police Forces (CAPF) की तैनाती की आवश्यकता को सिद्ध करने के लिए कोई खुफिया रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।