समीक्षा
\nThe Supreme Court on 29 September 2026 ने एक PIL को सुनने से इनकार किया जो स्कूलों और प्री‑यूनिवर्सिटी कॉलेजों में बुलीइंग और रैगिंग को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून और समान दिशानिर्देशों की मांग करता था। बेंच, जिसका नेतृत्व Chief Justice Surya Kant ने किया, ने कहा कि यह मुद्दा पहले के निर्णयों में ही निपटा जा चुका है, इसलिए नई याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
\n\nमुख्य विकास
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- तीन‑जज बेंच (Chief Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और V. Mohana) ने इस मामले पर मौजूदा Supreme Court के निर्णयों का हवाला दिया। \n
- कोर्ट ने याचिकाकर्ता Yadavi Aditya Rasiwasiya को संबंधित प्राधिकारियों को प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी, लेकिन कोई नई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया। \n
- PIL ने Centre, सभी राज्य और Union Territories, CBSE और CISCE को प्रतिवादी के रूप में नामित किया। \n
- याचिका ने एक mandamus आदेश की मांग की जो केंद्रीय मंत्रालयों को बुलीइंग/रैगिंग पर एक केंद्रीय legislation तैयार करने और लागू करने का निर्देश देता है। \n
- अतिरिक्त अनुरोधों में सभी शिक्षा बोर्डों के लिए बुलीइंग/रैगिंग के दुष्प्रभावों पर अनिवार्य पाठ्यक्रम मॉड्यूल शामिल थे। \n
महत्वपूर्ण तथ्य
\nयाचिका ने चार विशिष्ट परिणामों की मांग की:
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- बुलीइंग/रैगिंग पर एक समान केंद्रीय legislation का निर्माण। \n
- शिकायतों के समय पर निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देश। \n
- स्कूल पाठ्यक्रम में बुलीइंग/रैगिंग पर एक विषय का अनिवार्य समावेश। \n
- सभी केंद्रीय और राज्य स्तर पर इस विषय का समान अपनाना। \n