Overview
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि एक public servant भ्रष्टाचार के लिए उत्तरदायी हो सकता है भले ही वह व्यक्तिगत रूप से रिश्वत न माँगे या प्राप्त न करे। यह निर्णय Karnataka Police Sub‑Inspector (PSI) के खिलाफ एक FIR को पुनः स्थापित करता है, जिस पर ₹50,000 की रिश्वत को उप‑अधिकारियों के माध्यम से रूट करने का आरोप है।
Key Developments
- Bench of Justices Sanjay Karol and N. Kotiswar Singh ने Karnataka High Court के उस आदेश को रद्द किया जिसने FIR को खारिज कर दिया था।
- Court ने कहा कि Section 7 of the Prevention of Corruption Act तीसरे पक्षों के माध्यम से अनुचित लाभ प्राप्त करने के प्रयास को भी शामिल करता है।
- Explanation 2 to Section 7 महत्वपूर्ण था; यह निर्धारित करता है कि लाभ किसी अन्य व्यक्ति के लिए या मध्यस्थ के माध्यम से मांगा गया हो, इसका कोई महत्व नहीं है।
- निर्णय इस बात पर ज़ोर देता है कि “छिपी हुई माँग” भी, चाहे अधिकारी को पैसा न मिला हो, अपराध की प्राथमिक शर्त को पूरा करती है।
- Lokayukta पुलिस द्वारा दर्ज किया गया FIR अब परीक्षण के चरण में आगे बढ़ेगा।
Important Facts
• Respondent 1, Rangayya, Siruguppa पुलिस स्टेशन में Sub‑Inspector, ने एक शिकायतकर्ता को अनधिकृत रूप से राशन चावल बेचने के आरोप पर धमकी दी।
• एक अधीनस्थ के माध्यम से, Rangayya के निर्देश पर ₹50,000 की माँग की गई, जिसमें “उन लड़कों को खुश करो” का निर्देश दिया गया।
• Karnataka High Court ने FIR को खारिज कर दिया क्योंकि PSI ने न तो सीधे रिश्वत की माँग की और न ही उसे स्वीकार किया।
• Supreme Court ने इस संकीर्ण दृष्टिकोण को खारिज किया, यह कहते हुए कि Explanation 2 की वैधानिक भाषा स्पष्ट रूप से अप्रत्यक्ष या तृतीय‑पक्षीय भ्रष्टाचार को शामिल करती है।