Overview
The Supreme Court on 29 May 2026 ने ₹447.27 crore की विशाल disgorgement को रद्द किया, जो Reliance Industries Ltd (RIL) पर लगाया गया था। यह आदेश मूल रूप से Securities Appellate Tribunal (SAT) द्वारा पुष्टि किया गया था। कोर्ट ने पाया कि “fraud” की खोज PFUTP Regulations के तहत अस्थिर थी।
Key Developments
- SAT के बहुमत निर्णय को SEBI की धोखाधड़ी की खोज को बरकरार रखने में “egregious error” करने वाला माना गया।
- कोर्ट ने धोखाधड़ी की खोज को उलटा, जिससे ₹447.27 crore Disgorgement प्लस 12% ब्याज रद्द हो गया।
- RIL को Investors Protection Fund में पहले जमा किए गए ₹250 crore की वापसी का आदेश दिया गया।
- SEBI का यह अवलोकन कि RIL ने position‑limit नियमों का उल्लंघन किया, तकनीकी उल्लंघन के रूप में बरकरार रखा गया, धोखाधड़ी नहीं।
- कोर्ट ने खुलासे की आवश्यकताओं पर 2001 SEBI सर्कुलर के उल्लंघन के लिए SAT की दंडात्मक कार्रवाई के साथ सहमति व्यक्त की।
Important Facts of the Case
मार्च 2007 में RIL ने अपने सहायक Reliance Petroleum Ltd (RPL) में लगभग 5 % हिस्सेदारी (22.5 crore शेयर) बेचकर धन जुटाने का निर्णय लिया। 1‑6 Nov 2007 के बीच, RIL ने 12 एजेंटों को नियुक्त किया ताकि वे RPL के futures segment में 9.92 crore शेयर की शॉर्ट पोजीशन ले सकें, औसत कीमत ₹265.67 प्रति शेयर थी।
इसके बाद, 6‑29 Nov 2007 के दौरान, RIL ने नकद बाजार में 20.29 crore RPL शेयर बेचे, जिससे लगभग ₹4,500 crore की कमाई हुई। समाप्ति दिन (29 Nov 2007) पर, RIL ने 17 में से 12 ऑर्डर Last Traded Price से नीचे रखे, जिससे सेटलमेंट कीमत ₹215.25 प्रति शेयर तक गिर गई। इस कीमत में गिरावट ने शॉर्ट futures पोजीशन से लगभग ₹513 crore अतिरिक्त लाभ जोड़ा।
SEBI ने आरोप लगाया कि RIL ने “principal‑agent” मॉडल का उपयोग करके position‑limit नियमों को टाला।