<h3>Overview</h3>
<p>गुड़गांव की चार‑साल की बच्ची पर बलात्कार का आरोप लगाया गया। जब Max Healthcare के एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ को शो‑कॉज़ नोटिस जारी किया गया, तो मामला राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गया। डॉक्टर, <strong>Dr. Babita Jain</strong>, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, यह दावा करते हुए कि उन्होंने बच्ची की स्थिति पर अपना मेडिकल मत नहीं बदला है।</p>
<h3>Key Developments</h3>
<ul>
<li>Dr. Babita Jain, Principal Director और Max Healthcare में Paediatrics के Head, को बलात्कार के आरोप के बाद शो‑कॉज़ नोटिस जारी किया गया।</li>
<li>डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, यह बताते हुए कि नाबालिग की चोटों का उनका क्लिनिकल मूल्यांकन अपरिवर्तित है।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट अब यह जांच रहा है कि डॉक्टर की गवाही को स्वतंत्र साक्ष्य माना जा सकता है या प्रक्रियात्मक चूकों के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक है।</li>
</ul>
<h3>Important Facts</h3>
<p>पीड़ित, एक नाबालिग, ने गुड़गांव में यौन हमला करने का आरोप लगाया। शिकायत के बाद पुलिस ने POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान Dr. Jain ने बच्ची की जांच की और अपने निष्कर्ष दर्ज किए। बाद में जारी किया गया शो‑कॉज़ नोटिस यह सवाल उठाता है कि क्या उनकी मेडिकल राय बाहरी दबाव से प्रभावित हुई थी।</p>
<h3>UPSC Relevance</h3>
<p>यह घटना बाल यौन शोषण, फोरेंसिक चिकित्सा, और न्यायिक निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को छूती है, जो UPSC परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।</p>