Supreme Court ने फैसला सुनाया कि निजी “neighbourhood schools” को State द्वारा Right to Education Act (RTE) के तहत चयनित छात्रों को बिना किसी लंबित पात्रता विवाद की प्रतीक्षा किए प्रवेश देना अनिवार्य है। यह निर्णय Article 21A की संवैधानिक गारंटी को सुदृढ़ करता है और समावेशी शिक्षा प्रदान करने में neighbourhood school की भूमिका को स्पष्ट करता है।
मुख्य विकास
- Court ने कहा कि एक बार State चयन प्रक्रिया पूरी करके सूची भेज दे, तो स्कूलों को प्रवेश को अस्वीकार या विलंब करने का कोई विवेक नहीं है।
- स्कूल पात्रता पर स्पष्टीकरण मांग सकते हैं, लेकिन अंतरिम अवधि में प्रवेश को रोक नहीं सकते।
- यह निर्णय Allahabad High Court के इस दृष्टिकोण को समर्थन देता है कि स्कूल State के निर्णय पर “अपील में बैठ” नहीं सकते।
- यह निर्णय अनिवार्य Section 12 आरक्षण पर ज़ोर देता है, इसे सामाजिक समानता के लिए एक परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में वर्णित करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
• यह मामला तब उत्पन्न हुआ जब Uttar Pradesh Basic Education Department द्वारा आवंटित एक छात्र को Lucknow Public School, Eldico ने पात्रता के “अनिश्चितता” के आधार पर प्रवेश से इनकार कर दिया।
• बेंच में Justice Pamidighantam Sri Narasimha और Justice Alok Aradhe शामिल थे।
• Court ने ज़ोर दिया कि 25% आरक्षण एक “राष्ट्रीय मिशन” है और इसे दृढ़ता से लागू किया जाना चाहिए।
UPSC प्रासंगिकता
यह निर्णय UPSC पाठ्यक्रम के कई मुख्य क्षेत्रों को छूता है:
- संवैधानिक कानून (GS2): Article 21A की व्याख्या और RTE Act की वैधानिक शक्ति।
- सामाजिक न्याय (GS4): “स्थिति की समानता” प्राप्त करने में शिक्षा की भूमिका।