Supreme Court ने Sabarimala मंदिर मामले पर Day 2 को तर्क‑सुनवाई की, यह रेखांकित किया कि वह 2018 के फैसले की पुनः जांच नहीं करेगा बल्कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए नए संवैधानिक मुद्दों पर ही ध्यान केंद्रित करेगा।
मुख्य विकास (Day 2)
- Court ने कहा कि पहले का निर्णय जो सभी आयु की महिलाओं को Sabarimala में प्रवेश की अनुमति देता था, वह बना रहेगा; केवल नए संवैधानिक प्रश्नों को ही स्वीकार किया जाएगा।
- Justice Nagarathna ने कहा कि Article 17 के तहत संरक्षण को “महीने में तीन दिन” तक सीमित नहीं किया जा सकता, जिससे यह संकेत मिलता है कि कोई भी समय‑सीमा इस अनुच्छेद के उद्देश्य को नष्ट कर देगी।
- Solicitor General ने तर्क दिया कि भारत को पश्चिमी दृष्टिकोण से पितृसत्तात्मक या लिंग‑स्टीरियोटाइपेड लेबल नहीं किया जाना चाहिए, और Court से राष्ट्र के विशिष्ट सांस्कृतिक और कानूनी संदर्भ को ध्यान में रखने का आग्रह किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
याचिकाकर्ताओं ने 2018 के निर्णय की समीक्षा मांगी थी, जिसने 10‑50 वर्ष की महिलाओं पर मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध को निरस्त किया था। उनके तर्क कथित प्रक्रिया त्रुटियों और यह दावा करते हैं कि पहले के निर्णय ने कुछ संवैधानिक सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया, विशेष रूप से धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों के संबंध में।
जबकि Court मूल परिणाम को उलट नहीं देगा, उसने चर्चा के लिए मंच खोला है:
- धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में Fundamental Rights का दायरा।
- मंदिर प्रशासन के संदर्भ में Article 25 की व्याख्या।
- लिंग‑आधारित प्रतिबंधों पर Article 17 की लागूता।