Day 2 सुनवाई मुख्य बिंदु
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Sabarimala मामले की चल रही सुनवाई पहले के फैसले को दोबारा नहीं देखेगी; बल्कि यह अपनी जांच को मूल संवैधानिक प्रश्नों तक सीमित करेगी।
मुख्य विकास (Day 2)
- बेंच ने कहा कि पहले का निर्णय बना रहेगा और कोर्ट केवल यह जांचेगा कि Constitution को लिंग और जाति के मामलों में सही ढंग से व्याख्यायित किया गया है या नहीं।
- Justice Nagarathna ने ज़ोर दिया कि Article 17 को चयनात्मक रूप से लागू नहीं किया जा सकता, और "तीन दिन के लिए अस्पृश्यता" की धारणा को खारिज किया।
- Solicitor General ने तर्क दिया कि भारत पश्चिमी दृष्टिकोण से "पितृसत्तात्मक या लिंग‑स्टीरियोटाइप्ड" नहीं है, जिससे Constitution की Gender Equality के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश पड़ता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- सुनवाई एक बड़े पुनरावलोकन का हिस्सा है जो 2018 के Sabarimala फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसमें सभी आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।
- Article 17, जो Untouchability को समाप्त करता है, को याचिकाकर्ताओं ने मंदिर के संदर्भ से परे व्यापक सामाजिक सुधारों के लिए दलील के रूप में उपयोग किया।
- बेंच में वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल थे, जिसमें Justice Nagarathna ने चयनात्मक भेदभाव के लिए संवैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग पर उल्लेखनीय टिप्पणी की।
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