Overview
On May 27, 2026, a five‑judge bench of the Supreme Court headed by Chief Justice of India Surya Kant ने बिहार में electoral rolls के Special Intensive Revision (SIR) की संवैधानिकता को समर्थन दिया। इस निर्णय ने Election Commission of India की शक्तियों को स्पष्ट किया और देश भर में भविष्य के SIR दौरों के लिए एक मिसाल स्थापित की।
Key Developments
- कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि SIR एक गुप्त नागरिकता‑स्क्रीनिंग अभ्यास था।
- इसने पुष्टि की कि ECI को Article 324 के तहत रोल में शामिल करने के लिए नागरिकता सत्यापन का अधिकार है।
- निर्णय ने "indicative documents" के व्यापक सेट के उपयोग की अनुमति दी, जिसमें Aadhaar को 12वां दस्तावेज़ जोड़ा गया।
- कोर्ट ने ज़ोर दिया कि SIR के दौरान लिया गया कोई भी निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा।
Important Facts
- SIR का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 51 करोड़ मतदाताओं को कवर करता है, जिसमें West Bengal, Tamil Nadu और Assam शामिल हैं।
- बिहार की अंतिम रोल में 7.42 करोड़ योग्य मतदाता दिखाए गए हैं।
- कोर्ट ने ECI को आदेश दिया कि वह लगभग 65 लाख मतदाताओं की, जिन्हें ड्राफ्ट रोल से हटाया गया है, जिला‑वार, बूथ‑स्तर की खोज योग्य सूची प्रकाशित करे, जिसमें हटाने के कारण भी शामिल हों।
- याचिकाकर्ताओं में Association for Democratic Reforms शामिल था, जिसे वकीलों Prashant Bhushan और Neha Rathi ने प्रतिनिधित्व किया।
Exam Relevance
यह मामला संवैधानिक प्रावधानों (Article 324), वैधानिक कानून (Representation of the People Act और Citizenship Act के बीच की अंतःक्रिया को दर्शाता है, ...