Supreme Court ने दिव्यांग कैदियों के मुद्दों को High‑Powered Committee को सौंपा
Supreme Court ने 21 अप्रैल 2026 को दिव्यांग कैदियों के मामले को Suhas Chakma केस में गठित High‑Powered Committee को सौंपा। न्यायाधीश Vikram Nath और Sandeep Mehta की बेंच ने "प्रभावी, संरचित और समान तंत्र" की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि असिस्टिव‑डिवाइस की आपूर्ति और दिव्यांग कैदियों के समर्थन को सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य विकास
- Court ने Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD) के सचिव तथा राज्य सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभागों के सचिवों को तुरंत HPC कार्यवाही में भाग लेने का निर्देश दिया।
- सभी States/UTs को छह हफ्तों के भीतर HPC को अनुपालन शपथपत्र जमा करना होगा।
- HPC को असिस्टिव डिवाइस, गतिशीलता सहायता उपकरण और संबंधित दिशानिर्देशों के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने का कार्य सौंपा गया है, साथ ही जेल सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
- याचिकाकर्ता और हस्तक्षेपकर्ता HPC के सामने प्रतिनिधित्व दाखिल कर सकते हैं, जिन्हें कानून के अनुसार माना जाएगा।
- HPC को चार महीनों के भीतर Court को एकीकृत स्थिति रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें पहले के निर्देशों, जिसमें L. Muruganantham भी शामिल है, के अनुपालन की जानकारी होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
• यह निर्णय (C) No. 182/2025 की रिट पेटिशन से आया, जिसे Sathyan Naravoor ने दिव्यांग कैदियों की हिरासत की स्थितियों को चुनौती देने के लिए दायर किया था।
• Court ने बताया कि केवल कुछ States/UTs ने पहले के निर्देशों के तहत अनुपालन शपथपत्र दाखिल किए हैं, जो कार्यान्वयन में अंतर दर्शाता है।
• Court ने दोहराया कि दिव्यांग कैदियों के अधिकारों को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 और Articles 14 तथा 21 के संवैधानिक आश्वासनों के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए।
