अवलोकन
Supreme Court ने 17 March 2026 को Union को सामाजिक सुरक्षा के घटक के रूप में पितृत्व अवकाश के लिए एक समर्पित प्रावधान बनाने का आग्रह किया। यह दिशा-निर्देश तब आया जब कोर्ट दत्तक माताओं के लिए मातृत्व अवकाश पर प्रतिबंध की संवैधानिकता की जांच कर रहा था।
मुख्य विकास
- न्यायाधीश J.B. Pardiwala और न्यायाधीश R. Mahadevan की बेंच ने कहा कि Section 60(4) असंवैधानिक है।
- कोर्ट ने इस प्रावधान को पढ़कर, दत्तक माताओं को बच्चे की आयु की परवाह किए बिना पूर्ण 12 months का मातृत्व अवकाश प्रदान किया।
- उसी फैसले में, कोर्ट ने Union को पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून बनाने का निर्देश दिया, जिसमें लचीली अवधि होगी जो दोनों माता‑पिता और बच्चे की जरूरतों को पूरा करे।
महत्वपूर्ण तथ्य
• वर्तमान भारतीय कानून के तहत दो से कम जीवित बच्चों वाली महिलाओं को अधिकतम 26 weeks का वेतनभोगी मातृत्व अवकाश मिलता है, और दो या अधिक बच्चों वाली महिलाओं को 12 weeks का अवकाश मिलता है, जिसमें डिलीवरी से पहले अधिकतम 8 weeks की अनुमति है।
• वर्तमान में पितृत्व अवकाश के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, हालांकि कई निजी क्षेत्र की कंपनियां सीमित वेतनभोगी पितृत्व अवकाश प्रदान करती हैं।
• यह मामला W.P.(C) No. 960/2021 – Hamsaanandini Nanduri v. Union of India के रूप में दर्ज है।
UPSC प्रासंगिकता
• Social Security Code, 2020 भारत के श्रम सुधारों का एक प्रमुख घटक है; इसके प्रावधानों को समझना GS‑III के लिए आवश्यक है।
• यह फैसला Supreme Court की भूमिका को दर्शाता है।
