Overview
The Supreme Court ने उत्तर प्रदेश में आपराधिक ट्रायल में दीर्घकालिक देरी को कम करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाया है। यह देखते हुए कि Article 21 के तहत तेज़ परीक्षण का अधिकार केवल एक अमूर्त सुरक्षा नहीं रह सकता, कोर्ट ने Allahabad High Court को केस पेंडेंसी, अंडर‑ट्रायल डिटेंशन, जमानत आवेदन और न्यायिक रिक्तियों पर विस्तृत डेटा प्रदान करने का निर्देश दिया।
Key Developments
- Justice J.B. Pardiwala और Justice Ujjal Bhuyan की बेंच ने एक पूर्व पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ 35‑वर्षीय आपराधिक प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
- कोर्ट ने अपने 2019 के State of Kerala v. Rasheed दिशानिर्देशों को लागू किया, ट्रायल कोर्टों से विस्तृत case calendar तैयार करने और उसे सख्ती से पालन करने का आग्रह किया।
- July 13, 2026 को, Allahabad High Court को अनुरोधित जानकारी शपथपत्र के आधार पर प्रस्तुत करनी होगी।
- डेटा बिंदुओं में undertrial detention की पेंडेंसी, मामलों की आयु, जमानत आवेदन आँकड़े और न्यायिक अधिकारियों की रिक्ति स्थिति शामिल है।
Important Facts Gathered by the Court
निर्देशों में हाई कोर्ट को निम्नलिखित प्रदान करने का कहा गया है:
- Judicial Magistrates First Class और Chief Judicial Magistrates के सामने पेंडिंग आपराधिक मामलों की संख्या, उनके आयु और अंडर‑ट्रायल कैदियों की गिनती।
- पेंडिंग सत्र मामलों का विवरण, जिसमें हिरासत में आरोपी की संख्या शामिल है।
- मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायाधीशों के लिए judicial vacancies की वर्तमान शक्ति बनाम स्वीकृत शक्ति, और उन्हें भरने के लिए कोई भी लंबित प्रस्ताव।
- क्या जमानत आवेदन रिकॉर्ड हिरासत की अवधि को दर्शाते हैं; यदि नहीं, तो भविष्य के दाखिलों के लिए ऐसा डेटा रिकॉर्ड करने का आदेश।
- April 30, 2026 तक कुल जमानत आवेदन पेंडिंग, वर्ष के अनुसार और हिरासत की अवधि के अनुसार विभाजित।