Supreme Court ने West Bengal anti‑defection मामलों के त्वरित निपटारे का निर्देश दिया
Supreme Court ने 28 September 2026 को West Bengal Legislative Assembly के Speaker को 8 October तक Mamata Banerjee‑नेतृत्व वाली Trinamool Congress फेक्शन द्वारा विरोधी MLAs के समूह के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने को कहा। यह आदेश पहले के निर्णयों के अनुरूप है कि anti‑defection प्रक्रिया को उचित समय में पूरा किया जाना चाहिए।
मुख्य विकास
- Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व वाले बेंच ने Keisham Meghachandra Singh मामले से सिद्धांत को दोहराया।
- Senior counsel Kapil Sibal ने तर्क दिया कि Speaker की बार‑बार देरी एक “pattern” बनाती है जो parliamentary functioning को नुकसान पहुँचाती है।
- Election Commission ने पहले, 17 September को, TMC पार्टी प्रतीक को फ्रीज़ किया था ताकि दोनों फेक्शन समान स्थिति में रहें।
- Court ने कड़ा समय‑सीमा निर्धारित नहीं की, लेकिन “hope” व्यक्त की कि Speaker पहले के निर्णय के अनुसार कार्य करेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
• अयोग्यता याचिकाएँ 8 July 2026 को दायर की गईं, जो दस MLAs के खिलाफ थीं जिन्होंने 2026 Assembly elections के बाद एक अलग फ्रंट बनाया।
• याचिकाकर्ता, Sovandeb Chattopadhyay के नेतृत्व में, एक mandamus की मांग की, जो Speaker को मामलों का शीघ्र निर्णय देने का निर्देश देता है।
• विरोधी MLAs में Arup Roy, Ritabrata Banerjee, Firad Hakim, Sandipan Saha, Seuli Saha, Akrhruzzaman, Sabina Yeasmin, Rathin Ghosh, Biplab Mitra और Javed Ahmad Khan शामिल हैं।
• Court ने नोट किया कि Speaker “fully cognisant of the principles laid down” है और उसे उसी अनुसार कार्य करना चाहिए।
UPSC प्रासंगिकता
anti‑defection framework को समझना GS 2 (Polity) के लिए आवश्यक है। Tenth Schedule Speaker को सशक्त बनाता है