TVK की 2026 की जीत तमिलनाडु में: द्रविड़ विकास मॉडल के सामने चुनौतियां
C. Joseph Vijay और उनकी पार्टी TVK की हालिया जीत ने इस बात पर बहस छेड़ी है कि क्या तमिलनाडु लंबे समय से चले आ रहे द्रविड़ विकास मॉडल से हटेगा। जबकि पार्टी के घोषणापत्र में आर्थिक नीति की निरंतरता का संकेत है, राज्य अब आंतरिक विभाजनों और बाहरी दबावों का सामना कर रहा है जो उसकी विकास रणनीति की लचीलापन को परखते हैं।
मुख्य विकास (2026)
- TVK की चुनावी जीत राज्य‑नेतृत्व वाली औद्योगिक नीति के भविष्य को लेकर सवाल उठाती है।
- निवेश पूर्णता अनुपात 23.09% तक गिरता है (₹6.80 लाख करोड़ घोषित बनाम ₹1.57 लाख करोड़ पूर्ण, 2021‑25)।
- रोजगार लोच 0.01 नौकरियां प्रति करोड़ वादा किए गए पूंजी तक गिरती है, जो पहले के शासन की तुलना में बहुत कम है।
- उच्च शिक्षा में नामांकन 51% GER तक पहुंचता है, फिर भी नौकरी सृजन पीछे रह जाता है।
- बढ़ती अनुबंधितता और घटता वेतन हिस्सा श्रमिकों की सौदेबाजी शक्ति को कम कर रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य
तमिलनाडु एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बना हुआ है, जो Hyundai, Ford, Nokia, and Foxconn जैसी कंपनियों को आकर्षित करता है। हालांकि, घोषित और वास्तविक निवेश के बीच का अंतर बढ़ गया है, और वह MSMEs जो पहले आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ थे, अब पीछे हट रहे हैं। नवीनतम वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण दर्शाता है कि तमिलनाडु के लिए नौकरियों‑से‑पूंजी अनुपात 0.58 है, जबकि गुजरात के लिए 0.34 और महाराष्ट्र के लिए 0.33 है, जो सापेक्ष लाभ दर्शाता है लेकिन गिरावट की प्रवृत्ति को भी दिखाता है।
शिक्षा ने नाटकीय रूप से विस्तार किया है: राज्य का उच्च शिक्षा में GER 51% है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुना है, जबकि SC पुरुष और महिलाएं क्रमशः 38.8% और 40.4% पर हैं। फिर भी गुणवत्ता‑रोजगार असंतुलन का मतलब है कि कई स्नातक गिग कार्य तक सीमित हैं, जिससे स्थिर नौकरियों से जुड़ी गरिमा कम हो रही है।