अवलोकन
UGC ने Minimum Standards of Instruction for the Grant of UG and PG Degrees Regulations, 2025 जारी किए। एक प्रमुख प्रावधान सभी पाठ्यक्रमों के लिए निरंतर आंतरिक मूल्यांकन (CIE) को अनिवार्य करता है, जबकि सटीक भारांकन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक निकायों को सौंपता है। यह नियम निष्पक्षता, पारदर्शिता और छात्र‑केन्द्रित मूल्यांकन बनाने का लक्ष्य रखता है, जो अब 4.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों को सेवा प्रदान करता है।
मुख्य विकास
- सभी पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर‑वर्ष‑अंत परीक्षा के साथ निरंतर मूल्यांकन भी होना चाहिए।
- विश्वविद्यालय का Board of Studies विभाजन (जैसे, viva, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट) तय करता है और सेमेस्टर शुरू होने से पहले योजना प्रकाशित करना अनिवार्य है।
- छात्रों को अपने मूल्यांकित उत्तरपत्र देखना और पारदर्शी अंकन प्रक्रिया प्राप्त करना अधिकार है।
- IQAC अनुपालन का ऑडिट कर सकता है; डिफॉल्ट करने वाले संस्थानों को UGC मान्यता से हटा सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
भारत का Gross Enrolment Ratio (GER) वर्तमान में 30% है और 2035 तक इसे 50% करने का लक्ष्य है। देश में लगभग 1,278 विश्वविद्यालय और 46,000 कॉलेज हैं। फिर भी, केवल 51% संस्थानों ने National Higher Education Qualifications Framework (NHEQF) को अपनाया है। यह अंतर दर्शाता है कि नीति कार्यान्वयन असमान है।
UPSC प्रासंगिकता
इन नियमों को समझना कई GS पेपरों को छूता है। GS2 (Polity) को UGC जैसे वैधानिक निकायों और Boards of Studies तथा IQAC जैसे संस्थागत शासन संरचनाओं का ज्ञान आवश्यक है। GS3 (Education & Economy) GER, NHEQF, और रटे‑रटे सीखने से परिणाम‑आधारित शिक्षा की ओर बदलाव से संबंधित है। “नीति बनाम अभ्यास” का विषय GS4 (Ethics) में एक आवर्ती निबंध विषय है, जो आवश्यकता को उजागर करता है f