25 अगस्त 2026 को, Ambassador Harish Parvathaneni, भारत के Permanent Representative to the United Nations, ने UNSC को ‘Food Under Fire’ शीर्षक वाले उच्च‑स्तरीय बहस में संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि समुद्री मार्गों में, विशेषकर Strait of Hormuz में, व्यवधान खाद्य, उर्वरक, ईंधन और मानवीय सहायता की आपूर्ति को खतरे में डालते हैं, जिससे आयात‑निर्भर विकासशील देशों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचता है।
Key Developments
- भारत ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया ताकि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग सुरक्षित और हस्तक्षेप‑रहित रहें।
- यह तेज, निर्बाध मानवीय पहुँच की मांग करता है और चेतावनी देता है कि sanctions खाद्य या कृषि व्यापार को बाधित नहीं करना चाहिए।
- भारत ने आपूर्ति‑श्रृंखला व्यवधानों के वस्तुनिष्ठ, साक्ष्य‑आधारित मूल्यांकन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जिसमें FAO और WFP शामिल हों।
- यह कृषि इनपुट के विविधीकरण, जलवायु‑प्रतिरोधी फसलों जैसे मिलेट्स, और एकल उत्पादन मॉडल पर निर्भरता कम करने पर बल देता है।
Important Facts
UN Secretary‑General ने बताया कि 2025 ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे अधिक सशस्त्र संघर्ष और तीव्र भूख की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की, जिसमें 266 million लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। एक साथ सूडान और गाज़ा में दो अकाल की पुष्टि हुई, जिसे “शर्मनाक मील का पत्थर” कहा गया। Strait of Hormuz अकेले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग एक‑पाँचवाँ हिस्सा और उर्वरक व्यापार का एक‑तिहाई ले जाता है।
Exam Relevance
भोजन असुरक्षा – एक ऐसी स्थिति जहाँ लोगों को पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक भोजन तक भरोसेमंद पहुँच नहीं होती; अक्सर यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंध नीतियों से जुड़ी होती है।