The Union Cabinet ने 16 September 2026 को वेतन सीमा को अनिवार्य कवरेज के लिए EPFO में ₹15,000 से ₹25,000 प्रति माह तक बढ़ाने की स्वीकृति दी। यह परिवर्तन 17 September 2026 से प्रभावी होगा, जो Vishwakarma Jayanti के साथ मेल खाता है।
मुख्य विकास
- अधिकतम 51 lakh अतिरिक्त कर्मचारियों के अनिवार्य EPFO कवरेज में आने की उम्मीद है।
- वार्षिक वित्तीय व्यय लगभग ₹11,339 crore तक बढ़ जाता है, जो मौजूदा ₹10,250 crore से अधिक है।
- प्रति कर्मचारी नियोक्ता योगदान लगभग ₹600 बढ़ेगा; कर्मचारी का EPS में योगदान ₹2,082.5 (₹25,000 का 8.33%) तक बढ़ेगा।
- सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार औसत निजी‑क्षेत्र वेतन लगभग ₹23,000 है।
महत्वपूर्ण तथ्य
विस्तारित सीमा तीन मुख्य लाभ लाती है: EPS के तहत पेंशन तक पहुंच, EDLI के तहत मृत्यु‑बीमा, और प्रोविडेंट‑फंड बचत पर उच्च ब्याज आय। ट्रेड यूनियन ने इस कदम को “बहुत कम, बहुत देर” कहा, यह तर्क देते हुए कि महंगाई के कारण कम से कम ₹30,000 की सीमा आवश्यक है। नियोक्ता, विशेष रूप से MSMEs, अतिरिक्त नकदी प्रवाह के बारे में चिंताएँ व्यक्त करते हैं और सरकार से दो वर्षों के लिए इस वृद्धि को सब्सिडी देने का आग्रह किया।
UPSC प्रासंगिकता
EPFO ढांचे को समझना GS‑3 (Economy) के लिए आवश्यक है क्योंकि यह भारत की सामाजिक‑सुरक्षा संरचना, श्रम‑बाजार औपचारिकरण, और वित्तीय प्रभावों को दर्शाता है। यह निर्णय GS‑2 (Polity) को भी छूता है क्योंकि Union Cabinet और श्रम तथा वित्त मंत्रालय नीति‑निर्माणकर्ता हैं। ट्रेड यूनियन और नियोक्ता संगठनों के बीच बहस stakeholder negotiation और समान नीति डिजाइन पर GS‑4 (Ethics) के लिए एक केस स्टडी प्रदान करती है।