मुख्य बिंदु
The Union Cabinet ने 16 September 2026 को बैठक की और EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से ₹25,000 प्रति माह बढ़ाने की मंजूरी दी। यह कदम अधिक कर्मचारियों को सामाजिक‑security जाल में लाने का उद्देश्य रखता है।
मुख्य विकास
- ₹25,000 तक सीमा वृद्धि से अनिवार्य EPFO कवरेज में 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा जाएगा।
- सरकार का अनुमान है कि लगभग 1 करोड़ नए सब्सक्राइबर कवर किए जा सकते हैं।
- नियोक्ता का प्रोविडेंट फंड योगदान प्रति कर्मचारी ₹600 बढ़ेगा।
- EPS में योगदान वर्तमान ₹1,250 से बढ़कर ₹2,082.5 (नई सीमा का 8.33%) हो जाएगा।
- सरकार EPS पर अतिरिक्त ₹11,339 करोड़ खर्च करेगी, जो मौजूदा ₹10,250 करोड़ से बढ़ेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
- निजी‑क्षेत्र का औसत वेतन अब लगभग ₹23,000 है, जो उच्च सीमा को उचित ठहराता है।
- योगदान: कर्मचारी – बेसिक + डीए का 2%; नियोक्ता – PF में 3.67% और EPS में 8.33% (नई सीमा पर सीमित)।
- अतिरिक्त नियोक्ता शुल्क: EDLI के लिए 0.5% और प्रशासनिक शुल्क के रूप में 0.5%।
- वर्तमान EPFO आधार: 7.98 करोड़ योगदानकर्ता सदस्य 7.68 लाख संस्थानों में; EPS लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को सेवा देता है।
- ट्रेड यूनियन इस कदम को “बहुत कम, बहुत देर” कहती हैं; नियोक्ता, विशेषकर MSMEs, वित्तीय दबाव की चेतावनी देते हैं।
UPSC प्रासंगिकता
यह निर्णय दर्शाता है कि Union Cabinet सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने के लिए वित्तीय उपकरणों का उपयोग कैसे करती है। यह Code on Social Security और Code on Wages से जुड़ा है। इन कोड्स को समझना श्रम सुधार, सामाजिक‑