Unified Payments Interface (UPI) को 25 August 2016 को NPCI द्वारा लॉन्च किया गया था। 2026 में, Union Finance Ministry ने अपनी 10‑साल की यात्रा का जश्न मनाया, भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की रीढ़ और वित्तीय समावेशन के चालक के रूप में इसकी भूमिका को उजागर किया।
Key Developments (2026)
- वार्षिक लेन‑देन मात्रा FY17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर FY26 में 24,162 करोड़ हो गई – यह 13,000‑गुना वृद्धि है।
- लेन‑देन मूल्य FY17 में ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग FY26 में ₹314 लाख करोड़ हो गया – यह 4,000‑गुना से अधिक वृद्धि है।
- UPI अब 11 देशों में कार्यरत है, जिससे भारत की डिजिटल भुगतान पहुंच वैश्विक स्तर पर विस्तारित हुई।
- IMF ने लेन‑देन मात्रा के आधार पर UPI को विश्व की सबसे बड़ी रीयल‑टाइम भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी।
Important Facts
मंत्रालय ने UPI को DPI का एक स्तंभ बताया है। यह एक इंटरऑपरेबल, रीयल‑टाइम प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है जो एक ही एप्लिकेशन के माध्यम से पियर‑टू‑पियर और पियर‑टू‑मर्चेंट ट्रांसफ़र को समर्थन देता है। इसका पैमाना, विश्वसनीयता और इंटरऑपरेबिलिटी अन्य देशों के लिए मानक स्थापित कर चुके हैं।
Exam Relevance
UPI को समझना GS‑3 (Economy) के लिए आवश्यक है क्योंकि यह दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी कैसे वित्तीय समावेशन को तेज़ कर सकती है, डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा दे सकती है, और राजकोषीय पारदर्शिता को सुदृढ़ कर सकती है। Union Finance Ministry की भूमिका नीति‑प्रेरित नवाचार को दर्शाती है। अंतर्राष्ट्रीय मान्यता