लोक सभा ने एक संशोधन को मंजूरी दी है जो किसी भी UPI और RuPay लेन‑देनों पर सरचार्ज लगाने पर कानूनी प्रतिबंध को हटा देता है। जबकि सरकार कहती है कि शुल्क केवल ₹2,000 या अधिक की खरीद पर, और एक निर्धारित टर्नओवर सीमा से ऊपर के व्यवसायों पर लागू होगा, कानूनी प्रतिबंध को हटाने का मतलब है कि नीति को कभी भी बदला जा सकता है।
मुख्य विकास
- लोक सभा के संशोधन ने सभी UPI और RuPay डेबिट‑कार्ड लेन‑देनों पर सरचार्ज को वैध किया।
- सरकार केवल उन व्यापारियों पर, जिनका टर्नओवर निर्धारित है, ₹2,000 या अधिक के लेन‑देनों के लिए शुल्क प्रस्तावित करती है।
- RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा कि UPI इकोसिस्टम के लिए “किसी को भुगतान करना होगा”。
- भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में UPI को सब्सिडी देने में लगभग ₹2,000 करोड़ खर्च किए, जबकि नकद प्रिंटिंग लागत में लगभग ₹1,500 करोड़ बचत की।
- अंतर्राष्ट्रीय दबाव, विशेष रूप से United States से, इस संशोधन के पीछे एक प्रेरक कारक के रूप में उल्लेखित है।
महत्वपूर्ण तथ्य
डिजिटल भुगतान पारंपरिक नकद प्रणाली को बदलते हैं, जिसके लिए RBI को नोट और सिक्के बिना उपयोगकर्ताओं पर सीधे शुल्क के छापने पड़ते थे। डिजिटल प्रणाली चलाने की लागत भौतिक नकद की तुलना में बहुत कम है, फिर भी सरकार ने UPI को प्रोत्साहित करने में पहले ही ₹2,000 करोड़ खर्च कर दिए हैं। यह संशोधन राजस्व उत्पन्न कर सकता है, लेकिन यह उन डिजिटल लेन‑देनों की घर्षण‑रहित प्रकृति को कम करने का जोखिम भी रखता है, जिसने आर्थिक गतिविधि को प्रोत्साहित किया है।
UPSC प्रासंगिकता
इस नीति परिवर्तन को समझना GS‑III (Economy) और GS‑II (Polity) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उम्मीदवारों को विश्लेषण करना चाहिए:
- सार्वजनिक‑हित तर्क कैसे मुफ्त डिजिटल बुनियादी ढांचे को उचित ठहराते हैं।
- राजस्व उत्पन्न करने और आर्थिक दक्षता के बीच का समझौता।
- बाहरी दबाव (U.S. trade concerns, Brazil’s Pix पर टैरिफ) के भारत की संप्रभु नीति विकल्पों पर प्रभाव।
- घरेलू भुगतान नेटवर्क (Visa & Mastercard) की भूमिका।