UPSC Prelims 2026 के प्रमुख पर्यावरण विषय
UPSC Civil Services Preliminary Examination 24 May 2026 को निर्धारित है, इसलिए अभ्यर्थियों को पिछले वर्ष में समाचारों में प्रमुख रहे पर्यावरण‑संबंधी मुद्दों की केंद्रित पुनरावृत्ति की आवश्यकता है। नीचे दी गई सूची सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषयों को – समुद्री परिसंचरण और अंतरराष्ट्रीय संधियों से लेकर राष्ट्रीय रिपोर्टों और उभरते जलवायु‑वित्त तंत्रों तक – समूहित करती है, जिससे आप अपनी अध्ययन योजना को व्यवस्थित कर सकें।
1. समुद्री प्रक्रियाएँ और जलवायु संकेत
- AMOC – अटलांटिक का कन्वेयर बेल्ट गर्म पानी को उत्तर की ओर (जैसे Gulf Stream) ले जाता है और गहराई में ठंडा, नमकीन पानी को दक्षिण की ओर वापस करता है, जो क्षेत्रीय जलवायु और समुद्री उत्पादकता को प्रभावित करता है।
- उच्च समुद्री तापमान → अधिक परतबद्धता, CO₂ ग्रहण में कमी, अधिक बार समुद्री हीटवेव और तीव्र चक्रवात।
- Marine Protected Areas (MPAs) जैसे Dugong Conservation Reserve (Tamil Nadu) और Gahirmatha (Odisha) भारत के संवेदनशील समुद्री आवासों की सुरक्षा के प्रयास को दर्शाते हैं।
2. अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते
- Ramsar Convention – भारत ने 1 Feb 1982 को सदस्यता ली; अब साइटों की संख्या में दक्षिण एशिया में प्रथम स्थान पर है, जिसमें Sundarbans सबसे बड़ा है।
- Nagoya Protocol – भारत ने अपना पहला National Report प्रस्तुत किया, जिसमें तीन‑स्तरीय ABS ढाँचा (NBA, State Biodiversity Boards, Biodiversity Management Committees) को उजागर किया गया।
- Minamata Convention (COP‑6) – 2034 तक वैश्विक डेंटल अमाल्गम चरण‑बंद को अपनाया और कारीगर स्वर्ण खनन पर कार्रवाई को सुदृढ़ किया।
- Loss and Damage Fund – United States ने अपने बोर्ड से हटकर जलवायु वित्त में राजनीतिक चुनौतियों को उजागर किया।