On July 24, 2026 the Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को U.S. Senate ने मंजूरी दी। बिल पाँच सबसे बड़े रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस आयातकों पर 100 % तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, यदि वे कानून लागू होने के बाद भी खरीदारी जारी रखते हैं। जबकि House ने अभी तक मतदान नहीं किया है, यह उपाय भारत की व्यापार लागत को काफी बढ़ा सकता है।
Key Developments
- U.S. Senate ने प्रतिबंध बिल पारित किया; House की मंजूरी लंबित है।
- भारत, चीन और अन्य प्रमुख रूसी‑ऊर्जा खरीदारों पर 100 % तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
- India पहले से ही कई उत्पादों पर Section 301 के तहत 10 % का फोर्स्ड‑लेबर ड्यूटी का सामना कर रहा है।
- समग्र रूप से, India की टैरिफ एक्सपोजर 110 % तक पहुँच सकती है, जो प्रमुख व्यापार साझेदारों में सबसे अधिक है।
- सिमुलेशन अध्ययन जो GTAP का उपयोग करते हैं, प्रतिबंध परिदृश्य में लगभग $47 billion का वैलफेयर नुकसान दिखाते हैं।
- एक समानांतर परिदृश्य जिसमें India‑EU FTA और निर्यात विविधीकरण शामिल है, नुकसान को उलट देता है, लगभग $26 billion वैलफेयर जोड़ता है।
Important Facts
रूस‑यूक्रेन युद्ध से पहले, रूसी कच्चा तेल India के तेल आयात का केवल 2 % हिस्सा था। 2026 तक यह लगभग 50 % तक बढ़ गया, जहाँ मासिक आयात जनवरी में 4.54 MMT से मई में 8.96 MMT तक कूद गया। United States, जो Indian वस्तुओं का एक प्रमुख बाजार है, टैरिफ को एक भू-राजनीतिक लीवर के रूप में उपयोग कर रहा है।
forced‑labour tariffs के तहत लगाया गया फोर्स्ड‑लेबर ड्यूटी पहले से ही कई Indian निर्यातों में 10 % जोड़ता है। यदि नई प्रतिबंध लागू होते हैं, तो संयुक्त टैरिफ 110 % से अधिक हो सकता है, जिससे Indian उत्पाद U.S. में बहुत कम मूल्य‑प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे।
Exam Relevance
यह विकास कई GS‑3 विषयों को छूता है: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति, प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा, और आर्थिक विकास पर भू-राजनीतिक जोखिमों का प्रभाव। समझें