समीक्षा
United States और Israel के बीच चल रहे संघर्ष ने Iran के खिलाफ Strait of Hormuz की "double blockade" को Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और U.S. नौसैनिक बलों द्वारा लागू किया है। इसके प्रभाव भारत के मैक्रो‑इकॉनॉमिक संकेतकों में महसूस किए जा रहे हैं।
मुख्य विकास
- U.S. टैरिफ़ भारतीय वस्तुओं पर अभी भी लागू हैं, जिससे निर्यात दबाव बढ़ रहा है।
- IRGC की नौसैनिक उपस्थिति, U.S. बलों के साथ मिलकर, टैंकर ट्रैफ़िक को सीमित कर चुकी है, जिससे ऊर्जा बिल और शिपिंग एवं बीमा लागत बढ़ी है।
- सप्लाई‑चेन में व्यवधानों ने मार्च 2026 में निर्यात में 7% गिरावट लाई है।
- घरेलू महंगाई बढ़ रही है क्योंकि आयात‑संबंधित वस्तु कीमतें बढ़ रही हैं।
- रुपये के अवमूल्यन ने भारत को IMF के अनुसार विश्व अर्थव्यवस्थाओं में अनुमानित 4वें स्थान से 6वें स्थान पर गिरा दिया है।
महत्वपूर्ण तथ्य
• भारत की निर्यात टोकरी मार्च 2026 में 7% घट गई, जो खाड़ी बाजारों की कम मांग को दर्शाती है।
• ब्लॉकएड शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया 3% से अधिक कमजोर हुआ, जिससे खरीद शक्ति घट गई।
• ऊर्जा आयात लागत अनुमानित रूप से 12% साल‑दर‑साल बढ़ी, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में परिलक्षित हुई।
• IMF की नवीनतम World Economic Outlook भारत की जीडीपी वृद्धि को FY 2026‑27 के लिए 5.8% अनुमानित करती है, जो संघर्ष से पहले के 6.5% अनुमान से कम है।
UPSC प्रासंगिकता
इस परिदृश्य को समझना GS‑3 (Economy) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भू-राजनीतिक तनाव कैसे व्यापार जैसे मैक्रो‑इकॉनॉमिक चर में परिवर्तित होते हैं।
