सारांश: भारत के परमाणु पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर एक सम्मेलन में, Dr. Anil Kakodkar, AEC, ने NSG की पूर्ण सदस्यता की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान छूट को वापस लिया जा सकता है, जिससे महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आपूर्ति जोखिम में पड़ सकती है।
मुख्य विकास
- Kakodkar ने कूटनीतिक चैनलों से NSG सदस्यता सुरक्षित करने का आग्रह किया।
- उन्होंने आयातित यूरेनियम पर निर्भरता कम करने के लिए थोरियम के तेज़ तैनाती पर ज़ोर दिया।
- उन्होंने SHANTI Act में कानूनी प्रतिबंधों को उजागर किया, विशेष रूप से molten‑salt reactors जैसे नवीन रिएक्टर डिज़ाइनों के लिए।
- पूर्व UN राजदूत T.S. Tirumurti ने परमाणु ऊर्जा में बढ़ते वैश्विक निजी पूँजी और उन्नत विनिर्माण सहयोगों को नोट किया।
- प्रोफ. Manu Santhanam ने IIT‑Madras में स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करने की ओर इशारा किया, जो SHANI Act की प्रावधानों से लाभान्वित हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
वर्तमान यूरेनियम आपूर्ति
भारत NSG छूट के तहत अपने यूरेनियम का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यह छूट एक अस्थायी रियायत है और बिना विस्तृत सूचना के वापस ली जा सकती है।
SHANTI Act की कानूनी सीमाएँ
यह अधिनियम कुछ गतिविधियों को केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित करता है। उदाहरण के तौर पर, एक molten‑salt reactor डिज़ाइन जो कोर के भीतर बैक‑एंड ईंधन प्रसंस्करण को एकीकृत करता है, वर्तमान कानून के तहत प्रतिबंधित होगा।
तीन‑स्तरीय कार्यक्रम
भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति, तीन‑स्तरीय कार्यक्रम, ...