The BIS ने भारत के भूकंप‑जोनिंग मानचित्र के ड्राफ्ट संशोधन को वापस ले लिया है, जिसे नवंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था। 3 मार्च 2026 को घोषित इस वापसी का मुख्य कारण अनुमानित लागत वृद्धि और बुनियादी ढांचा एवं आवास परियोजनाओं के कार्यान्वयन में चुनौतियां हैं। यह घटना वैज्ञानिक कठोरता, आपदा तैयारी और शहरी विकास की किफायतीता के बीच तनाव को उजागर करती है।
मुख्य विकास
- ड्राफ्ट संशोधन ने एक नई शीर्ष‑जोखिम श्रेणी, Zone VI, पेश की, जिससे उच्च‑जोखिम वाले क्षेत्रों का विस्तार हुआ।
- लागत अनुमान दर्शाते हैं कि एक‑जोन अपग्रेड से निर्माण खर्च लगभग 20 % बढ़ सकता है, जबकि दो‑जोन उछाल से लगभग एक‑तिहाई वृद्धि हो सकती है।
- हितधारकों—जिसमें Ministry of Housing and Urban Affairs, Central Water Commission और National Dam Safety Authority—ने चिंता व्यक्त की कि कड़ी ज़ोनिंग से महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी होगी और कम‑आय वाले घरों को अनौपचारिक क्षेत्र में और अधिक धकेला जाएगा, जहाँ पहले से ही भारत की लगभग 80 % जनसंख्या रहती है।
- निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों ने भी ड्राफ्ट का विरोध किया, मेट्रो, बांध, पावर स्टेशन और राजमार्गों के लिए व्यवहार्यता और वित्तीय बाधाओं का हवाला देते हुए।
महत्वपूर्ण तथ्य
भारत ने पारंपरिक रूप से एक स्थिर, निर्धारक ज़ोनिंग मॉडल पर निर्भर किया है। प्रस्तावित परिवर्तन PSHA की ओर वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, लेकिन इसे भारतीय संदर्भ में “बहुत कठोर” माना गया। ड्राफ्ट की शीर्ष‑जोखिम श्रेणी उन क्षेत्रों को प्रभावित करेगी जो पहले से ही आर्थिक रूप से नाज़ुक हैं, जिससे बड़े‑पैमाने के बुनियादी ढांचे के अनुपालन की लागत बढ़ सकती है।
UPSC प्रासंगिकता
- आपदा प्रबंधन (GS3): भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन विधियों को समझना an
