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भारत में दवा‑प्रतिरोधी फंगल रोगजनक Candida auris का उदय – PGIMER अनुसंधान से प्राप्त अंतर्दृष्टि

PGIMER के अनुसंधान से पता चलता है कि बहु‑दवा‑प्रतिरोधी फंगस Candida auris भारत में तेज़ी से फैल रहा है, जिसमें एज़ोल्स के प्रति उच्च प्रतिरोध और जीन डुप्लिकेशन व उत्परिवर्तनों के कारण इकोनोकैंडिन्स के प्रति उभरता प्रतिरोध देखा गया है। ये निष्कर्ष उन्नत निदान सुविधाओं, संशोधित संवेदनशीलता परीक्षण, और इस जलवायु‑प्रेरित स…
समीक्षा फंगल संक्रमण जो पहले केवल त्वचा समस्याओं तक सीमित थे, अब गंभीर, कभी‑कभी घातक, खतरे के रूप में उभर रहे हैं। सबसे चिंताजनक विकास भारत में Candida auris का प्रसार है। पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च ( PGIMER ) के शोध से पता चलता है कि यह रोगजनक मौजूदा एंटीफंगल दवाओं से कैसे बचता है। मुख्य विकास C. auris के 90% से अधिक क्लिनिकल आइसोलेट्स एज़ोल दवाओं जैसे फ्लुकोनाज़ोल के प्रति प्रतिरोधी हैं। लगभग 30% पॉलीन्स के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं, जबकि अधिकांश केवल echinocandins के प्रति संवेदनशील रहते हैं। जीनोमिक अध्ययन ने Erg11 जीन की अतिरिक्त प्रतियों और Fks1 जीन में उत्परिवर्तनों की पहचान की। इकोनोकैंडिन्स की उच्च खुराक Eagle effect को प्रेरित करती है, जिससे मानक संवेदनशीलता परीक्षणों की उपयोगिता सीमित हो जाती है। महत्वपूर्ण तथ्य फंगी 30 °C से नीचे की तापमान में पनपते हैं, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि गर्म‑सहिष्णु स्ट्रेनों के लिए चयनात्मक दबाव बनाती है जो मानव शरीर के 37 °C तापमान पर जीवित रह सकते हैं। यह “ mammalian selection hypothesis ” हाल के आक्रामक फंगल रोगों में वृद्धि को समझाता है। भारतीय अस्पतालों में, लगभग 20% रिपोर्ट किए गए संक्रमण फंगल होते हैं, फिर भी कई निदान क्षमता नहीं रखते। PGIMER के 15,000 क्लिनिकल आइसोलेट्स के संग्रह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अनुसंधान में मदद मिलती है। UPSC प्रासंगिकता उभरते फंगल खतरों को समझना कई GS पेपरों से जुड़ा है: GS3 – स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन: दवा शीर्षक: Candida auris दवा प्रतिरोध भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को खतरे में डालता है और त्वरित नीति कार्रवाई की मांग करता है। एआई सारांश: भारत में Candida auris, एक गर्म‑सहिष्णु फंगस, जो अधिकांश एंटीफंगल दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है, में तेज़ी से वृद्धि देखी जा रही है। यह प्रसार अस्पताल निदान में अंतराल, जलवायु परिवर्तन और नए रोगजनकों के बीच संबंध, और दवा प्रतिरोध और निगरानी पर नीति कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करता है। संदर्भ: Candida auris यह दर्शाता है कि जलवायु‑प्रेरित गर्म‑सहिष्णु फंगस कैसे आक्रामक बन सकते हैं, जिससे GS3 स्वास्थ्य और GS3 पर्यावरण जुड़ते हैं। यह PGIMER जैसी संस्थाओं की रोग निगरानी में भूमिका को भी दिखाता है, जो GS1 और GS4 में निदान और दवाओं की समान पहुंच पर चर्चा के लिए एक प्रमुख बिंदु है। मुख्य प्रश्न का कोण: GS3 में, उम्मीदवार एंटीफंगल प्रतिरोध की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती पर चर्चा कर सकते हैं और प्रयोगशाला क्षमता को सुदृढ़ करने तथा दवा‑परीक्षण दिशानिर्देशों को अपडेट करने जैसे उपाय प्रस्तावित कर सकते हैं। एक संभावित प्रश्न में जलवायु‑परिवर्तन अनुकूलन को संक्रामक‑रोग नीति के साथ एकीकृत करने के बारे में पूछा जा सकता है।
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Quick Reference

Key Insight

शीर्षक: Candida auris दवा प्रतिरोध भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को खतरे में डालता है और त्वरित नीति कार्रवाई की मांग करता है।

Key Facts

  1. भारत में Candida auris के 90% से अधिक आइसोलेट्स एज़ोल दवाओं जैसे फ्लुकोनाज़ोल के प्रति प्रतिरोधी हैं।
  2. लगभग 30% आइसोलेट्स पॉलीन दवाओं के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं, जिससे इकोनोकैंडिन्स मुख्य विकल्प बनते हैं।
  3. चंडीगढ़ स्थित PGIMER लगभग 15,000 क्लिनिकल फंगल आइसोलेट्स का संग्रह राष्ट्रीय अनुसंधान के लिए रखता है।
  4. भारत में रिपोर्ट किए गए अस्पताल संक्रमणों में लगभग 20% फंगल होते हैं, लेकिन कई प्रयोगशालाएँ उन्हें सटीक रूप से पहचान नहीं पाती हैं।
  5. जीनोमिक अध्ययन ने Erg11 जीन की अतिरिक्त प्रतियों और Fks1 जीन में उत्परिवर्तनों की पहचान की, जो दवा प्रतिरोध का कारण बनते हैं।
  6. ‘Eagle effect’ – उच्च दवा खुराक पर विरोधाभासी वृद्धि – मानक संवेदनशीलता परीक्षण को सीमित करता है।

Background

संदर्भ: Candida auris यह दर्शाता है कि जलवायु‑प्रेरित गर्म‑सहिष्णु फंगस कैसे आक्रामक बन सकते हैं, जिससे GS3 स्वास्थ्य और GS3 पर्यावरण जुड़ते हैं। यह PGIMER जैसी संस्थाओं की रोग निगरानी में भूमिका को भी दिखाता है, जो GS1 और GS4 में निदान और दवाओं की समान पहुंच पर चर्चा के लिए एक प्रमुख बिंदु है।

UPSC Syllabus

  • Prelims_GS — Biology and Health
  • GS2 — Issues relating to Health, Education, Human Resources
  • Prelims_CSAT — Basic Numeracy
  • Essay — Education, Knowledge and Culture
  • Essay — Economy, Development and Inequality
  • GS1 — Population and Associated Issues
  • Prelims_CSAT — Logical Reasoning

Mains Angle

मुख्य प्रश्न का कोण: GS3 में, उम्मीदवार एंटीफंगल प्रतिरोध की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती पर चर्चा कर सकते हैं और प्रयोगशाला क्षमता को सुदृढ़ करने तथा दवा‑परीक्षण दिशानिर्देशों को अपडेट करने जैसे उपाय प्रस्तावित कर सकते हैं। एक संभावित प्रश्न में जलवायु‑परिवर्तन अनुकूलन को संक्रामक‑रोग नीति के साथ एकीकृत करने के बारे में पूछा जा सकता है।

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Overview

Full Article

समीक्षा

फंगल संक्रमण जो पहले केवल त्वचा समस्याओं तक सीमित थे, अब गंभीर, कभी‑कभी घातक, खतरे के रूप में उभर रहे हैं। सबसे चिंताजनक विकास भारत में Candida auris का प्रसार है। पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के शोध से पता चलता है कि यह रोगजनक मौजूदा एंटीफंगल दवाओं से कैसे बचता है।

मुख्य विकास

  • C. auris के 90% से अधिक क्लिनिकल आइसोलेट्स एज़ोल दवाओं जैसे फ्लुकोनाज़ोल के प्रति प्रतिरोधी हैं।
  • लगभग 30% पॉलीन्स के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं, जबकि अधिकांश केवल echinocandins के प्रति संवेदनशील रहते हैं।
  • जीनोमिक अध्ययन ने Erg11 जीन की अतिरिक्त प्रतियों और Fks1 जीन में उत्परिवर्तनों की पहचान की।
  • इकोनोकैंडिन्स की उच्च खुराक Eagle effect को प्रेरित करती है, जिससे मानक संवेदनशीलता परीक्षणों की उपयोगिता सीमित हो जाती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

फंगी 30 °C से नीचे की तापमान में पनपते हैं, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि गर्म‑सहिष्णु स्ट्रेनों के लिए चयनात्मक दबाव बनाती है जो मानव शरीर के 37 °C तापमान पर जीवित रह सकते हैं। यह “mammalian selection hypothesis” हाल के आक्रामक फंगल रोगों में वृद्धि को समझाता है।

भारतीय अस्पतालों में, लगभग 20% रिपोर्ट किए गए संक्रमण फंगल होते हैं, फिर भी कई निदान क्षमता नहीं रखते। PGIMER के 15,000 क्लिनिकल आइसोलेट्स के संग्रह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अनुसंधान में मदद मिलती है।

UPSC प्रासंगिकता

उभरते फंगल खतरों को समझना कई GS पेपरों से जुड़ा है:

  • GS3 – स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन: दवा
  • शीर्षक: Candida auris दवा प्रतिरोध भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को खतरे में डालता है और त्वरित नीति कार्रवाई की मांग करता है।
  • एआई सारांश: भारत में Candida auris, एक गर्म‑सहिष्णु फंगस, जो अधिकांश एंटीफंगल दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है, में तेज़ी से वृद्धि देखी जा रही है। यह प्रसार अस्पताल निदान में अंतराल, जलवायु परिवर्तन और नए रोगजनकों के बीच संबंध, और दवा प्रतिरोध और निगरानी पर नीति कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करता है।
  • संदर्भ: Candida auris यह दर्शाता है कि जलवायु‑प्रेरित गर्म‑सहिष्णु फंगस कैसे आक्रामक बन सकते हैं, जिससे GS3 स्वास्थ्य और GS3 पर्यावरण जुड़ते हैं। यह PGIMER जैसी संस्थाओं की रोग निगरानी में भूमिका को भी दिखाता है, जो GS1 और GS4 में निदान और दवाओं की समान पहुंच पर चर्चा के लिए एक प्रमुख बिंदु है।
  • मुख्य प्रश्न का कोण: GS3 में, उम्मीदवार एंटीफंगल प्रतिरोध की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती पर चर्चा कर सकते हैं और प्रयोगशाला क्षमता को सुदृढ़ करने तथा दवा‑परीक्षण दिशानिर्देशों को अपडेट करने जैसे उपाय प्रस्तावित कर सकते हैं। एक संभावित प्रश्न में जलवायु‑परिवर्तन अनुकूलन को संक्रामक‑रोग नीति के साथ एकीकृत करने के बारे में पूछा जा सकता है।
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शीर्षक: Candida auris दवा प्रतिरोध भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को खतरे में डालता है और त्वरित नीति कार्रवाई की मांग करता है।

Key Facts

  1. भारत में Candida auris के 90% से अधिक आइसोलेट्स एज़ोल दवाओं जैसे फ्लुकोनाज़ोल के प्रति प्रतिरोधी हैं।
  2. लगभग 30% आइसोलेट्स पॉलीन दवाओं के प्रति प्रतिरोध दिखाते हैं, जिससे इकोनोकैंडिन्स मुख्य विकल्प बनते हैं।
  3. चंडीगढ़ स्थित PGIMER लगभग 15,000 क्लिनिकल फंगल आइसोलेट्स का संग्रह राष्ट्रीय अनुसंधान के लिए रखता है।
  4. भारत में रिपोर्ट किए गए अस्पताल संक्रमणों में लगभग 20% फंगल होते हैं, लेकिन कई प्रयोगशालाएँ उन्हें सटीक रूप से पहचान नहीं पाती हैं।
  5. जीनोमिक अध्ययन ने Erg11 जीन की अतिरिक्त प्रतियों और Fks1 जीन में उत्परिवर्तनों की पहचान की, जो दवा प्रतिरोध का कारण बनते हैं।
  6. ‘Eagle effect’ – उच्च दवा खुराक पर विरोधाभासी वृद्धि – मानक संवेदनशीलता परीक्षण को सीमित करता है।

Background & Context

संदर्भ: Candida auris यह दर्शाता है कि जलवायु‑प्रेरित गर्म‑सहिष्णु फंगस कैसे आक्रामक बन सकते हैं, जिससे GS3 स्वास्थ्य और GS3 पर्यावरण जुड़ते हैं। यह PGIMER जैसी संस्थाओं की रोग निगरानी में भूमिका को भी दिखाता है, जो GS1 और GS4 में निदान और दवाओं की समान पहुंच पर चर्चा के लिए एक प्रमुख बिंदु है।

UPSC Syllabus Connections

Prelims_GS•Biology and HealthGS2•Issues relating to Health, Education, Human ResourcesPrelims_CSAT•Basic NumeracyEssay•Education, Knowledge and CultureEssay•Economy, Development and InequalityGS1•Population and Associated IssuesPrelims_CSAT•Logical Reasoning

Mains Answer Angle

मुख्य प्रश्न का कोण: GS3 में, उम्मीदवार एंटीफंगल प्रतिरोध की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती पर चर्चा कर सकते हैं और प्रयोगशाला क्षमता को सुदृढ़ करने तथा दवा‑परीक्षण दिशानिर्देशों को अपडेट करने जैसे उपाय प्रस्तावित कर सकते हैं। एक संभावित प्रश्न में जलवायु‑परिवर्तन अनुकूलन को संक्रामक‑रोग नीति के साथ एकीकृत करने के बारे में पूछा जा सकता है।

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