Chinese researchers कहते हैं कि उच्च तापमान ने ग्लेशियरों को सिकुड़ने और नई ग्लेशियल झीलों के निर्माण का कारण बना है, जिससे भारत और नेपाल में नीचे की ओर बहने वाले क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मुख्य विकास
- प्लेटो पर ग्लेशियर क्षेत्र 39,000 km² तक गिर गया, जो पहले के छह दशकों के अध्ययनों में 44,000 km² और 51,000 km² से कम है।
- कुल ग्लेशियर नुकसान लगभग 24% है; दक्षिणी प्लेटो (Gangdise, Nyenchen Tanglha, Himalayas) में सिकुड़ाव लगभग 60 वर्षों में 40% है।
- ग्लेशियल झीलों के विस्तार के साथ ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) जोखिम की संख्या बढ़ी है।
- अब प्लेटो पर 14,000 से अधिक ग्लेशियल झीलें 1,100 km² से अधिक को कवर करती हैं, जो चीन की दक्षिणी सीमाओं के निकट प्रति वर्ष औसत 1% की दर से बढ़ रही हैं।
- नेपाल‑चीन सीमा पर घातक 26 अगस्त 2026 की ग्लेशियर ढहने ने तत्काल खतरे को उजागर किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
Chinese Academy of Sciences के Institute of Mountain Hazards and Environment (IMHE) के अनुसार, यह वापसी मुख्यतः ग्लोबल वार्मिंग के कारण है। पिघलाव ने सीधे ग्लेशियल झीलों की संख्या और आकार दोनों को बढ़ा दिया है, जिससे भूस्खलन, बाढ़ और अन्य आपदाओं के लिए एक “परफेक्ट स्टॉर्म” बन गया है।
UPSC प्रासंगिकता
ये निष्कर्ष कई UPSC विषयों के साथ जुड़े हैं:
- जल सुरक्षा: प्लेटो Indus, Brahmaputra और Yangtze नदियों को जल प्रदान करता है; ग्लेशियर नुकसान नीचे की ओर जल उपलब्धता को खतरे में डालता है।
- आपदा प्रबंधन: बढ़ता GLOF जोखिम मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और सीमा‑पार समन्वय की मांग करता है।
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